राजस्थानी भाषा संवैधानिक मान्यता की हकदार: प्रो. शर्मा

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जोधपुर, 18 मई । राजस्थानी विश्व की समृद्धतम भाषाओं में एक है। पंद्रह सौ वर्षों का गौरवमयी साहित्यिक इतिहास जिसकी अनमोल धरोहर है। देश के सर्वोच्च न्यायालय ने जिस राजस्थानी को प्राथमिक शिक्षा में अध्ययन अनिवार्य विषय करने के लिए राज्य सरकार को निर्देशित किया है वह राजस्थानी निश्चित रूप से संवैधानिक मान्यता की हकदार है। यह विचार जयनारायण व्यास विश्वविद्यालय के कुलगुरु प्रोफेसर (डॉ.) पवन कुमार शर्मा ने राजस्थानी विभाग एवं राजस्थानी छात्र शोध परिषद द्वारा सोमवार को आयोजित चलकोई फाउंडेशन स्कॉलरशिप समारोह में व्यक्त किये।

उन्होंने कहा कि राजस्थानी भाषा में विद्यार्थियों का भविष्य उज्ज्वल है। राजस्थानी विभागाध्यक्ष डॉ. गजेसिंह राजपुरोहित ने बताया कि कला संकाय अधिष्ठाता प्रोफेसर (डॉ.) औतारलाल मीणा ने राजस्थानी भाषा साहित्य की सराहना करते हुए राजस्थानी विभाग के कार्यों को प्रेरणादायक बताया। समारोह में मुख्य वक्ता चलकोई फाउंडेशन के अध्यक्ष राजवीरसिंह ने कहा कि मां, मायडभाषा अर मायड़भोम री कोई होड नीं कर सकै। मातृभाषा का महत्व उजागर करते हुए कहा कि जो बालक मातृभाषा में शिक्षा ग्रहण करता है वह अन्य सीखी हुई भाषा में शिक्षा ग्रहण करने वाले बालकों से ज्यादा बुद्धिमान होता है।

विशिष्ट अतिथि प्रोफेसर (डॉ.) लक्ष्मीकान्त व्यास ने कहा कि वर्तमान में राजस्थानी भाषा का महत्व बढ़ रहा है जो इसकी संवैधानिक मान्यता के लिए महत्वपूर्ण कदम सिद्ध होगा। विशिष्ट अतिथि डॉ. सुरेश सालवी ने कहा कि राजस्थान प्रदेश में प्राथमिक शिक्षा राजस्थानी भाषा में ही होनी चाहिए।इस अवसर पर चलकोई फाउण्डेशन द्वारा राजस्थानी विभाग में अध्ययनरत एमए के विद्यार्थियों एवं शोधार्थियों को तीन लाख से अधिक राशि की छात्रवृत्ति प्रदान की गई। हाल ही में आरएएस में चयनित राजस्थानी विद्यार्थी श्रवणसिंह चिडिय़ा एवं जेल प्रहरी पद पर चयनित राजस्थानी छात्र ईश्वरसिंह भाटा का अभिनंदन किया गया। विभागीय सदस्य डॉ. मीनाक्षी बोराणा ने धन्यवाद ज्ञापित किया।