सतना, 17 मई । मध्य प्रदेश के सतना जिला अस्पताल में एचआईवी कांड के बाद एक बार फिर खून के सौदागर सक्रिय हो गये हैं. मरीज के परिजनों को आठ हजार रुपए में दो यूनिट ब्लड बेचा गया और उसका पेमेंट ऑनलाइन यूपीआई के जरिए लिया गया। इसके बाद थैली में खून दिया जिसे जब चेक किया गया तो वह क्लॉटेड निकला। यह मामला सामने आने के बादजिला अस्पताल में हड़कंप मच गया है और जांच शुरू हो गई है।
दरअसल, जिला अस्पताल में भर्ती रीवा जिला अंतर्गत महादेवा सेमरिया निवासी रामऔतार साकेत बारह मई को सड़क दुर्घटना में घायल हो गए थे। उन्हें उपचार के लिए जिला अस्पताल के आर्थो वॉर्ड में भर्ती कराया गया था। जांच में हीमोग्लोबिन सात ग्राम मिलने पर डॉक्टरों ने दो यूनिट ए पॉजिटिव ब्लड की जरूरत बताई थी। जिस पर मरीज के परिजनों ने ब्लड बैंक में संपर्क किया तो उन्हें वहां पर ब्लड नहीं मिला। बल्कि किसी परिजन के परिचय और सगे संबंधी का ब्लड डोनेट करने को कहा गया। लेकिन जब मरीज के परिजनों को ब्लड नहीं मिला तो एक व्यक्ति द्वारा उन्हें आठ हजार रुपए में खून दिलाने के लिए कहा गया और मरीज के परिजन मान गए।
मरीज के परिजनों ने उसे ऑनलाइन यूपीआई के माध्यम से आठ हजार रुपए दे दिए और उसने थैली में दो यूनिट ब्लड लाकर परिजनों को दे दिया। यह दो यूनिट ब्लड रीवा से मंगाया जाना दलाल द्वारा परिजन को बताकर दिया गया। जिसके बाद खून जांच में क्लॉटेड निकला और फिर अस्पताल प्रबंधन हरकत में आ गया। मामले की जांच पड़ताल शुरू कर दी।
इस मामले पर जिला चिकित्सालय सिविल सर्जन डॉ अमर सिंह ने बताया कि “जिला अस्पताल के अर्थों “हड्डी वार्ड” में एक मरीज भर्ती है उसे दो यूनिट ए पाजिटिव ब्लड कि आवश्यकता थी। जिला अस्पताल के ब्लड बैंक में ए पाजिटिव ब्लड न होने पर पीड़ित के परिजनों को अपने किसी संबंधी से ब्लड डोनेट के लिए कहा गया। वहीं मरीज के परिजन किसी व्यक्ति से दो यूनिट ब्लड एक थैली में लेकर आये और जिला अस्पताल में दिया। जब उस ब्लड कि मरीज को चढ़ाने से पहले जांच की गई तो वह ब्लड क्लॉटेड निकला. फिर इसकी सूचना हमें प्राप्त हुई। तब हमने मरीज के परिजनों से इसके बारे में पूछा तो उन्होंने ने बताया कि आठ हजार रुपए में उन्हें एक दलाल रमेश साहू नामक व्यक्ति से दो यूनिट ए पाजिटिव ब्लड रीवा के विंध्या ब्लड बैंक से ला कर देना बताया।
फिर मामले की सूचना सिविल सर्जन ने एसडीएम सिटी राहुल सिलाडिया को दी और पूरे मामले की जांच के लिए सिविल सर्जन ने तीन सदस्यीय टीम गठित की। जिसमें जिला अस्पताल ब्लड बैंक प्रभारी डॉ अंकिता पांडेय, ड्रग इंस्पेक्टर प्रियंका चौबे, जिला अस्पताल सहायक प्रबन्धक डॉ धीरेंद्र वर्मा शामिल हैं. वहीं मामले पर एसडीएम और स्वास्थ्य विभाग की तीन सदस्यीय टीम द्वारा पूरे मामले की जांच की जा रही है।
वही, इस मामले पर एसडीएम सिटी राहुल सिलाडिया ने बताया कि “जिला अस्पताल सिविल सर्जन ने यह सूचना दी की अस्पताल में भर्ती मरीज को दो यूनिट ब्लड कि आवश्यकता थी, जिसमें एक व्यक्ति जो ब्लड का दलाल है उसके द्वारा रीवा के विंध्या ब्लड बैंक से दो यूनिट ब्लड लाकर दिया गया है। उस खून के एवज में मरीज के परिजन से ऑनलाइन यूपीआई के माध्यम से आठ हजार रुपए की राशि ली गई है और जांच में वह खून खराब पाया गया। जिसकी जांच पड़ताल की जा रही है।
सतना में बीते कुछ माह पहले दिसबर 2025 में जिला चिकित्सालय में 5 थैलेसीमिया पीड़ित मासूम बच्चों को एच आई वी ब्लड चढ़ा दिया गया था। जिसके बाद पांचों मासूम के एच आई वी पीड़ित होने का मामला सामने आने पर सनसनी फैल गई थी। इस मामले की जांच दिल्ली एवं भोपाल की टीम कर रही है। यह मामला अभी ठंडा नहीं हुआ और एक बार फिर खून के दलाल जिला चिकित्सालय में सक्रिय हो चुके हैं।