दवा विक्रेताओं का 20 मई को राष्ट्रव्यापी बंद का ऐलान

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हरिद्वार, 17 मई । देशभर के दवा विक्रेताओं के राष्ट्रीय संगठन ऑल इण्डिया ऑर्गेनाईजेशन आफॅ केमिस्ट एंड ड्रगिस्ट ने 20 मई को एक दिवसीय राष्ट्रव्यापी बंद का ऐलान किया है। संगठन का कहना है कि ऑनलाइन फार्मेसी की अनियंत्रित कार्यप्रणाली, अवैध दवा बिक्री और कॉरपोरेट कंपनियों द्वारा दी जा रही भारी छूट से छोटे केमिस्टों का अस्तित्व संकट में पड़ गया है।

उत्तरांचल औषधि व्यवसायी महासंघ के महामंत्री अमित गर्ग ने प्रेस क्लब में पत्रकारों से वार्ता करते हुए बताया कि यह बंद केवल व्यापारिक हितों के लिए नहीं, बल्कि जनस्वास्थ्य और मरीजों की सुरक्षा के लिए भी बेहद जरूरी है। संगठन के अनुसार देशभर के करीब 12.40 लाख केमिस्ट एवं वितरक इस आंदोलन में शामिल होंगे, जिससे लगभग 5 करोड़ लोगों की आजीविका जुड़ी हुई है।

बताया कि संगठन ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को भेजे ज्ञापन में कहा है कि लंबे समय से सरकार को दवा व्यापार से जुड़ी गंभीर समस्याओं से अवगत कराया जा रहा है, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है। इससे दवा विक्रेताओं में भारी रोष व्याप्त है।

उन्होंने कहाकि ई-फार्मेसी प्लेटफॉर्म नियमों की शिथिलता का लाभ उठाकर बिना भौतिक सत्यापन के दवाओं की बिक्री कर रहे हैं। इससे एक ही प्रिस्क्रिप्शन का बार-बार इस्तेमाल हो रहा है। कहाकि एआई आधारित फर्जी प्रिस्क्रिप्शन के जरिए एंटीबायोटिक्स और नशीली दवाओं की अनियंत्रित बिक्री हो रही है, जिससे ‘एंटी माइक्रोबियल रेसिस्टेंस’ जैसी गंभीर स्वास्थ्य समस्या पैदा हो सकती है। यह सीधे तौर पर जनस्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ है।

संगठन ने बड़े कॉरपोरेट घरानों पर डीप डिस्काउंटिंग के जरिए बाजार का संतुलन बिगाड़ने का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि आवश्यक दवाओं का मार्जिन पहले से ही सरकार द्वारा निर्धारित है, इसके बावजूद भारी छूट देकर अनुचित प्रतिस्पर्धा पैदा की जा रही है। कहाकि इसका सबसे अधिक असर ग्रामीण और अर्ध-शहरी क्षेत्रों के छोटे दवा विक्रेताओं पर पड़ रहा है। यदि यही स्थिति रही तो आने वाले समय में स्थानीय दवा आपूर्ति व्यवस्था पूरी तरह प्रभावित हो सकती है।

संगठन ने कोविड-19 के दौरान जारी अधिसूचना को तत्काल वापस लेने की मांग की है। उनका कहना है कि यह केवल आपातकालीन परिस्थिति के लिए लागू की गई थी, लेकिन अब भी जारी रहने से औषधि नियमों के प्रावधान कमजोर हो रहे हैं।

इसके साथ ही ई-फार्मेसी से संबंधित अधिसूचना को वापस लेने और सभी दवा विक्रेताओं के लिए समान अवसर नीति लागू करने की भी मांग की गई है। उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि यदि 20 मई तक सरकार ने कोई ठोस निर्णय नहीं लिया, तो संगठन अनिश्चितकालीन आंदोलन के लिए बाध्य होगा।