राज्यपाल ने ‘कृष्ण राधा से रणभूमि तक’ नाट्य प्रस्तुति का अवलोकन किया

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लखनऊ, 16 मई । उत्तर प्रदेश की राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने शनिवार को जुपिटर ऑडिटोरियम, इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान लखनऊ में आयोजित ‘कृष्ण राधा से रणभूमि तक’ नाट्य प्रस्तुति का अवलोकन किया। उन्होंने नाट्य प्रस्तुति की सराहना करते हुए निर्माता नीलम मुंतशिर को बधाई दी तथा कहा कि महिलाएं आज प्रत्येक क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य कर रही हैं। जब समाज में महिलाओं का सम्मान होता है, तभी राष्ट्र प्रगति करता है।

राज्यपाल ने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण का चरित्र समाज को जीवन मूल्यों, कर्तव्यनिष्ठा एवं धर्म के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देता है। उन्होंने नाटक में प्रस्तुत कर्ण प्रसंग का उल्लेख करते हुए कहा कि यह प्रसंग महाभारत के अभिमन्यु प्रसंग की भी याद दिलाता है। कर्ण और अर्जुन दोनों भाई थे, लेकिन उनके जीवन और कर्मों में कितना बड़ा अंतर था, यह हमें जीवन की दिशा चुनने का संदेश देता है।

उन्होंने कहा कि इस प्रकार के भव्य मंचन टीमवर्क का उत्कृष्ट उदाहरण होते हैं। प्रत्येक व्यक्ति अपने-अपने कौशल का उपयोग कर सामूहिक प्रयासों से लक्ष्य तक पहुंच सकता है। नाटक का मंचन अत्यंत कठिन कार्य है, इसलिए ऐसे कलाकारों को समाज का प्रोत्साहन, प्रेम और विश्वास अवश्य मिलना चाहिए।

राज्यपाल ने कहा कि भारतीय दर्शन और संस्कृति को अभिव्यक्त करने वाले छोटे-छोटे नाटकों एवं ड्रामा का मंचन विद्यालयों में किया जाना चाहिए। बच्चे केवल पढ़कर उतना नहीं सीख पाते, जितना नाट्य मंचन देखकर सहज रूप से सीख लेते हैं। उन्होंने कहा कि बच्चों के लिए ऐसे नाटक लिखे जाने चाहिए, जिनसे वे हमारे पौराणिक चरित्रों एवं कथाओं को समझ सकें। उन्होंने कहा कि भाषा का ज्ञान भी अत्यंत आवश्यक है। इस बात का बहुत महत्व है कि कब, कहां, क्या और कितना बोलना है।

राज्यपाल ने ‘कृष्णावतारम् पार्ट-1 द हार्ट (हृदयम्)’ फिल्म का उल्लेख करते हुए कहा कि यह अत्यंत उत्कृष्ट फिल्म है, जिसमें श्री सत्यभामा के चरित्र को संस्कृति जयना ने प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया है। नई पीढ़ी के अनेक लोगों को यह जानकारी नहीं थी कि नरकासुर का वध श्री सत्यभामा ने किया था। ऐसी फिल्मों को अवश्य देखना चाहिए, क्योंकि इससे नए कलाकारों को सम्मान और प्रेरणा मिलती है।