नई दिल्ली, 13 अप्रैल । उच्चतम न्यायालय ने गाजियाबाद में चार साल की लड़की के दुष्कर्म और हत्या के मामले में एफआईआर दर्ज करने में उत्तर प्रदेश पुलिस की ओर से आनाकानी करने पर गहरा असंतोष जताया है। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली बेंच ने कहा कि हर स्तर पर असहयोग बरता गया। पुलिस से लेकर अस्पताल तक मदद में कोताही बरती गई।
सुनवाई के दौरान उप्र सरकार की ओर से पेश एएसजी ऐश्वर्या भाटी ने कहा कि इस मामले में चार्जशीट दाखिल कर दी गई है और संबंधित कोर्ट ने चार्जशीट पर संज्ञान ले लिया है। उसके बाद कोर्ट ने गाजियाबाद पुलिस को पीड़िता के परिवार को चार्जशीट की प्रति उपलब्ध कराने का आदेश दिया। कोर्ट ने गाजियाबाद के उन दो अस्पतालों को जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया जिन्होंने इलाज करने से इनकार कर दिया था।
इसके पहले कोर्ट ने 10 अप्रैल को मामले की लचर जांच के लिए पुलिस कमिश्नर और जांच अधिकारी को तलब किया था। सुनवाई के दौरान कोर्ट ने पीड़िता के पिता की ओर से पेश वरिष्ठ वकील एन हरिहरन की दलीलों पर गौर किया था, जिसमें कहा गया कि पुलिस ने जांच में काफी लापरवाही बरती है। लड़की के पिता दिहाड़ी मजदूर हैं। दो निजी अस्पतालों ने भी लड़की का इलाज करने से इनकार कर दिया। इस पर मुख्य न्यायाधीश ने दोनों अस्पतालों को उनकी असंवेदनशीलता के लिए फटकार लगाई है।
दरअसल, 16 मार्च को पीड़िता को उसके पड़ोसी ने चॉकलेट खरीदने के बहाने बाहर ले गया। जब लड़की नहीं लौटी तो उसके पिता ने काफी खोजबीन की। बाद में लड़की खून से सनी हुई बेहोशी की हालत में मिली। बाद में लड़की की इलाज के दौरान मौत हो गई।