सीआरएस निरीक्षण सफल : नीमच-रतलाम रेल खंड के दोहरीकरण का 85 प्रतिशत से अधिक का कार्य पूर्ण

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मंदसौर, 12 मार्च । पश्चिम रेलवे के रतलाम मंडल के अंतर्गत लगभग 133 किलोमीटर लंबे नीमच-रतलाम रेल खंड के दोहरीकरण का कार्य तेज गति से प्रगति पर है। इस परियोजना के तहत 10 एवं 11 मार्च 2026 को मल्हारगढ़- मंदसौर रेल खंड का रेल संरक्षा आयुक्त (सीआरएस) द्वारा निरीक्षण एवं गति परीक्षण सफलतापूर्वक सम्पन्न किया गया।

पश्चिम परिमंडल के रेल संरक्षा आयुक्त श्री ई. श्रीनिवास ने 10 मार्च 2026 को मल्हारगढ़ – मंदसौर रेल खंड का विस्तृत निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान उन्होंने नवीन दोहरीकृत रेल लाइन के अंतर्गत निर्मित पुलों, ओवरहेड इक्विपमेंट (ओएचई), रेलवे ट्रैक, सिग्नलिंग व्यवस्था तथा अन्य सभी संरक्षा संबंधी व्यवस्थाओं का गहन परीक्षण किया। इसके पश्चात 11 मार्च 2026 को इस नवीन दोहरीकृत खंड पर निरीक्षण यान को 120 किलोमीटर प्रतिघंटा से अधिक गति से चलाकर ट्रैक की गुणवत्ता और संरक्षा मानकों की जांच की गई। निरीक्षण एवं गति परीक्षण संतोषजनक पाए जाने के उपरांत रेल संरक्षा आयुक्त द्वारा मल्हारगढ़झ्रमंदसौर रेल खंड पर यात्री एवं मालगाड़ियों के संचालन के लिए उपयुक्तता प्रमाणपत्र जारी किया गया।

मल्हारगढ़-मंदसौर खंड के लगभग 23.35 किलोमीटर लंबे दोहरीकृत ट्रैक को ट्रेन संचालन की अनुमति मिलने के साथ ही नीमच-रतलाम दोहरीकरण परियोजना का लगभग 85 प्रतिशत से अधिक कार्य पूर्ण हो चुका है। कुल 133 किलोमीटर लंबे इस रेलखंड में से अब तक लगभग 115 किलोमीटर रेल लाइन का दोहरीकरण पूरा किया जा चुका है और हम नीमच-रतलाम दोहरीकरण के अंतिम पड़ाव पर पहुँच चुके हैं।

इस परियोजना के शेष हिस्सों अर्थात मंदसौर-दलौदा रेल खंड तथा रतलाम-धौसवास रेल खंड पर कार्य तीव्र गति से जारी है। रेलवे प्रशासन द्वारा इन शेष खंडों के दोहरीकरण कार्य को भी शीघ्र पूर्ण कर ट्रेन संचालन के लिए खोलने का लक्ष्य रखा गया है। नीमच-रतलाम रेल खंड का दोहरीकरण पूर्ण होने के पश्चात रतलाम-चित्तौड़गढ़ रेल खंड पूर्णत: दोहरीकृत एवं विद्युतीकृत रेल मार्ग बन जाएगा। इससे इस सेक्शन की परिचालन क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि होगी।

दोहरीकरण से ट्रेनों के क्रॉसिंग एवं पासिंग में लगने वाले समय में कमी आएगी, जिससे यात्री ट्रेनों की समयबद्धता में सुधार होगा तथा यात्रियों को अपने गंतव्य स्टेशन तक शीघ्र पहुंचने में सुविधा मिलेगी। इसके अतिरिक्त रतलाम-चित्तौड़गढ़ क्षेत्र में स्थित सीमेंट, जिंक तथा अन्य औद्योगिक इकाइयों के लिए मालगाड़ियों की आवाजाही और अधिक सुगम हो जाएगी। इससे क्षेत्रीय औद्योगिक विकास को भी गति मिलने की संभावना है।

पश्चिम रेलवे रतलाम मंडल द्वारा इस महत्वपूर्ण दोहरीकरण परियोजना को समयबद्ध रूप से पूर्ण करने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं, जिससे यात्रियों और उद्योगों को बेहतर रेल सुविधाएं उपलब्ध कराई जा सकें।