नई दिल्ली, 09 मार्च । उच्चतम न्यायालय ने उन्नाव दुष्कर्म मामले में दिल्ली उच्च न्यायालय में कुलदीप सिंह सेंगर को उम्रकैद की सजा के खिलाफ दायर याचिका में पीड़िता को पक्षकार बनाने की अनुमति दे दी है। चीफ जस्टिस सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली बेंच ने कहा कि दुष्कर्म पीड़िता को भी सुनवाई के दौरान अपनी बात रखने का अधिकार है।
उच्चतम न्यायालय ने कहा कि उच्च न्यायालय में उम्रकैद की सजा को चुनौती देने वाली याचिका में दुष्कर्म पीड़िता तीन हफ्ते में अपना पक्ष रख सकती है। तीस हजारी कोर्ट ने 16 दिसंबर, 2019 को दुष्कर्म पीड़िता के पिता की हिरासत में हत्या के मामले में कुलदीप सिंह सेंगर को 10 साल की कैद की सजा सुनाई थी और 10 लाख का जुर्माना भी लगाया था। तीस हजारी कोर्ट ने सेंगर समेत सभी सातों आरोपितों को भी 10-10 साल की कैद और 10-10 लाख के जुर्माने की सजा सुनाई थी।
दुष्कर्म पीड़िता के पिता की न्यायिक हिरासत में 9 अप्रैल, 2018 को मौत हो गई थी। दुष्कर्म पीड़िता ने 4 जून, 2017 को जब कुलदीप सेंगर पर दुष्कर्म का आरोप लगाया था उसके बाद कुलदीप सिंह सेंगर के भाई अतुल सिंह और उसके साथियों ने पीड़िता के पिता को बुरी तरह पीटने के बाद पुलिस को सौंप दिया था। दुष्कर्म पीड़िता के पिता को जेल में शिफ्ट करने के कुछ ही घंटों बाद जिला अस्पताल में लड़की के पिता की मौत हो गई थी।
पीड़िता से दुष्कर्म के मामले में 20 दिसंबर, 2019 को तीस हजारी कोर्ट ने सेंगर को उम्रकैद की सजा सुनाई थी। कोर्ट ने उम्रकैद के अलावा 25 लाख का जुर्माना लगाया था। जुर्माने की इस रकम में से 10 लाख पीड़िता को देने का आदेश दिया था। तीस हजारी कोर्ट के इस फैसले के खिलाफ भी कुलदीप सिंह सेंगर ने दिल्ली उच्च न्यायालय में याचिका दायर की है।