उत्तर प्रदेश में मौसम में लगातार परिवर्तन देखने को मिल रहा है। शनिवार को प्रदेश के 65 जिलों में बादलों की छाया रही और बारिश की संभावना बनी हुई है। पिछले 24 घंटों के दौरान, 7 जिलों में बारिश हुई, जिसमें महाराजगंज में सर्वाधिक 10.3 मिमी वर्षा दर्ज की गई। इसी प्रकार, वाराणसी में शुक्रवार को तेज आंधी के साथ हवा की रफ्तार लगभग 50 किलोमीटर प्रति घंटे तक पहुंच गई। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने चेतावनी दी है कि 65 जिलों में हवा की गति 40 से 60 किलोमीटर प्रति घंटे तक हो सकती है, और कुछ स्थानों पर गरज-चमक के साथ बारिश और बिजली गिरने की घटनाएं भी हो सकती हैं। इसके कारण, लोगों को खराब मौसम के समय घरों के अंदर रहने की सलाह दी गई है।
मौसम में इस परिवर्तन के पीछे क्या कारण है? IMD के मौसम विज्ञानी डॉ. नरेश कुमार बताते हैं कि सेंट्रल एशिया और हिमालय से आने वाली ठंडी हवाएं उत्तर-पश्चिम और मध्य भारत में बादल, वर्षा और आंधी-तूफान लाती हैं। वर्तमान में, ये हवाएं तेज गति से चल रही हैं। इसके अलावा, देश में हीट वेव का प्रभाव भी सक्रिय है। जब ये दोनों हवाएं आपस में टकराती हैं, तो मौसम में अचानक बदलाव आ जाता है। यही वजह है कि देश के बड़े हिस्से में दिन के समय में हीट वेव, जबकि रात में आंधी-तूफान और बारिश देखी जा रही है, जिसका प्रभाव उत्तर प्रदेश पर भी पड़ रहा है।
आने वाले तीन दिनों में मौसम का हाल कैसा रहने वाला है, इस पर मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि दक्षिण-पश्चिम मानसून केरल में अगले 3-4 दिनों में दस्तक दे सकता है। मौसम विभाग ने बताया कि अरब सागर में चक्रवात की स्थिति है, जिसके प्रभाव से मानसून तेजी के साथ आगे बढ़ रहा है। आमतौर पर, दक्षिण-पश्चिम मानसून 1 जून तक केरल पहुंच जाता है और 8 जुलाई तक पूरे देश में फैल जाता है। इसके बाद, यह 17 सितंबर के आस-पास उत्तर-पश्चिम भारत से पीछे हटना शुरू कर देता है और 15 अक्टूबर तक पूरी तरह से समाप्त हो जाता है। पिछले वर्ष, मानसून 30 मई को केरल में पहुंचा था, जो कि सामान्य समय से थोड़ा पहले था।
इस तरह, उत्तर प्रदेश में मौसम के लगातार बदलते रूख से नागरिकों को सावधानी बरतने की जरूरत है। खासकर, जो लोग खेतों में काम कर रहे हैं या दूसरे खुले स्थानों पर हैं, उन्हें मौसम की चेतावनियों का ध्यान रखना चाहिए। सरकार की ओर से दिए गए दिशा-निर्देशों का पालन करने में ही भलाई है, ताकि किसी भी अप्रिय स्थिति से बचा जा सके। मौसम विज्ञानियों का ये कहना है कि सभी को मौसम के बदलाव के प्रति सचेत रहकर अपनी सुरक्षा सुनिश्चित करनी चाहिए।