अंबेडकर जयंती पर भाजपा-संघ का बड़ा दांव, दलित वोटबैंक में सेंध की तैयारी!

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राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ (RSS) और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने डॉ. भीमराव अंबेडकर की जयंती के अवसर पर दलित वोट बैंक पर अपनी दृष्टि केंद्रित की है। इस आयोजन के माध्यम से उनका उद्देश्य आरक्षण समाप्त करने और संविधान में बदलाव के संदर्भ में चल रहे नरेटिव को तोड़ना है। संघ और भाजपा के कार्यकर्ता 13 से 25 अप्रैल तक दलित बस्तियों में जाकर पूर्ववर्ती सरकारों, जैसे कांग्रेस और सपा, को आरक्षण और संविधान पर कटघरे में खड़ा करेंगे। भाजपा के लिए यह एक महत्वपूर्ण अवसर है, क्योंकि उन्होंने पहली बार अंबेडकर जयंती पर 13 दिन के कार्यक्रमों की योजना बनाई है। इस दौरान, संघ कार्यालय में पथ संचलन भी आयोजित किया जाएगा, जो दलित समुदाय के बीच भाजपा के प्रयासों को मजबूती प्रदान करेगा।

भाजपा के प्रदेश महामंत्री धर्मपाल सिंह और अन्य नेताओं की अगुआई में 13 अप्रैल को अंबेडकर मैराथन का आयोजन किया जाएगा, जिसमें अनुसूचित जातियों के चार हजार से अधिक युवा शामिल होने की उम्मीद है। इस मैराथन का मकसद दलित युवाओं को भाजपा के साथ जोड़ना और यह बताना है कि पार्टी हर कदम पर उनके साथ है। नीरज सिंह ने कहा कि समाजवादी पार्टी और कांग्रेस ने दलितों को गुमराह करने के लिए अपने राजनीतिक दांव का सहारा लिया है, जबकि भाजपा ने बाबा साहब की सकारात्मक उपलब्धियों को आगे लाने के लिए अपने प्रयासों को बढ़ाया है।

संघ द्वारा कई जिलों में पथ संचलन का आयोजन किया जाएगा, जिसमें बाबा साहब के जीवन और उनके योगदान को उजागर किया जाएगा। इसके अंतर्गत, सभी जिलों में बाबा साहब के स्मारकों की साफ-सफाई होगी और उनकी मूर्तियों पर पुष्पांजलि अर्पित की जाएगी। युवाओं को जोड़ने के लिए महाविद्यालयों में विचार गोष्ठियाँ आयोजित की जाएंगी। संघ का उद्देश्य यह है कि दलित और पिछड़े वर्ग के लोग अन्य वर्गों के साथ सामूहिक भोज में हिस्सा लें, जिससे समाज में समरसता बढ़े।

भाजपा बाबा साहब की जयंती पर सम्मान समारोह का आयोजन कर रही है जिसमें सीएम योगी आदित्यनाथ दलितों में सपा के पीडीए फॉर्मूले को तोड़ने के लिए रणनीति साझा करेंगे। 15 से 25 अप्रैल तक सभी जिलों में विचार गोष्ठियाँ आयोजित की जाएंगी, जिसमें प्रदेश के मंत्री और पदाधिकारी कांग्रेस और सपा पर हमलावर रहेंगे। उनका कहना है कि दोनों पार्टियों ने बाबा साहब का अपमान किया है, जबकि भाजपा ने उनके योगदान को सम्मानित किया है।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यूपी की 403 सीटों में से 200 से अधिक सीटों पर एससी वोट निर्णायक भूमिका निभाते हैं। ऐसे में भाजपा और संघ मिशन 2027 के तहत दलित वोट बैंक को मजबूत करने की हर संभव कोशिश कर रहे हैं। हालांकि, भाजपा संगठन में दलितों का प्रतिनिधित्व अभी सीमित है, जिससे पार्टी को यहाँ सुधारने की आवश्यकता महसूस हो रही है।

भाजपा के प्रयासों से स्पष्ट है कि वह दलित वोट बैंक पर कोई भी चूक नहीं करने की कोशिश कर रही है। यह उनके लिए अब से पहले से ज्यादा महत्वपूर्ण है, जब राजनीति में दलितों का सशक्तीकरण चर्चा का विषय बना हुआ है और कई दल इस वोट बैंक पर अपनी नजरें गढ़ाए हुए हैं। 2024 के चुनावों में भाजपा का लक्ष्य है कि वह दलित समुदाय के साथ अधिक से अधिक संपर्क स्थापित करे और उनके अधिकार व सम्मान को सुनिश्चित करने के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को साबित करे।