देहरादून, 10 अक्टूबर । उत्तराखंड में हाल में हुई अतिवृष्टि और ओलावृष्टि से खरीफ की फसलों को नुकसान पहुंचा है। कृषि विभाग के प्रारंभिक आकलन के अनुसार, प्रदेश में खरीफ-2026 की 8,372.31 हेक्टेयर कृषि भूमि प्रभावित हुई है। कृषि मंत्री गणेश जोशी ने विभागीय अधिकारियों को प्रभावित क्षेत्रों में नियमित निगरानी करने, स्थलीय सर्वेक्षण कराने और नुकसान का विस्तृत आकलन करने के निर्देश दिए हैं।
कृषि मंत्री ने शनिवार को अधिकारियों से दूरभाष पर बातचीत कर फसलों की स्थिति की जानकारी ली। उन्होंने कहा कि प्रभावित किसानों को नियमानुसार सहायता उपलब्ध कराने के लिए विभागीय अधिकारी गंभीरता और तत्परता से काम करें। उन्होंने सर्वेक्षण में किसी भी प्रकार की लापरवाही नहीं बरतने के निर्देश भी दिए।
विभागीय आकलन के अनुसार, ऊधम सिंह नगर जिले के बाजपुर और गदरपुर क्षेत्रों में करीब 7,730 हेक्टेयर क्षेत्र में धान और गन्ने की फसल प्रभावित हुई है। हरिद्वार जिले की बहादराबाद, बादशाहपुर और जमालपुर न्याय पंचायतों में लगभग 600 हेक्टेयर कृषि क्षेत्र को नुकसान पहुंचा है। यहां मुख्य रूप से धान की फसल प्रभावित हुई है।
बागवानी फसलों को भी कई जिलों में नुकसान हुआ है। अल्मोड़ा जिले के चौखुटिया और लमगड़ा विकासखंडों में 15 से 70 प्रतिशत तक क्षति का आकलन किया गया है। चंपावत जिले के चंपावत, पाटी, लोहाघाट और बाराकोट विकासखंडों में 33 प्रतिशत से अधिक नुकसान दर्ज किया गया है। नैनीताल जिले के हल्द्वानी, कोटाबाग और रामनगर क्षेत्रों में बागवानी फसलों को करीब 10 प्रतिशत नुकसान हुआ है।
हरिद्वार जिले के बहादराबाद और लक्सर क्षेत्रों में लगभग पांच हेक्टेयर में सब्जियों की फसल प्रभावित हुई है। यहां करीब 30 पेड़ गिरने और तीन पॉलीहाउस क्षतिग्रस्त होने की भी जानकारी दी गई है। देहरादून के रायपुर विकासखंड में फसलों को 10 से 15 प्रतिशत, रुद्रप्रयाग में करीब 20 प्रतिशत और टिहरी गढ़वाल के घनसाली क्षेत्र में लगभग 30 प्रतिशत नुकसान का आकलन किया गया है। पौड़ी गढ़वाल के नैनीडांडा और रिखणीखाल विकासखंडों में भी करीब 30 प्रतिशत फसल क्षति बताई गई है।
कृषि विभाग के अधिकारियों के अनुसार, फसल बीमा कराने वाले किसानों की क्षति संबंधी रिपोर्ट बीमा कंपनियों को भेज दी गई है। प्रारंभिक सर्वेक्षण पूरा हो चुका है, जबकि विभागीय और राजस्व कार्मिकों की संयुक्त टीमों के माध्यम से सर्वेक्षण की कार्रवाई जारी है।
कृषि मंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि प्रभावित क्षेत्रों की स्थिति पर लगातार नजर रखी जाए और नुकसान का आकलन समयबद्ध तरीके से पूरा किया जाए, ताकि पात्र किसानों को नियमानुसार सहायता उपलब्ध कराने की कार्रवाई की जा सके।————
