शिमला, 16 अक्टूबर । शिमला शहर में बालूगंज और चक्कर के बीच बन रही दो बड़ी इमारतों के निर्माण को लेकर हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय ने कड़ा रुख अपनाया है। अदालत ने मौके पर आगे किसी भी तरह का निर्माण करने पर रोक लगा दी है और शिमला नगर निगम को तुरंत निर्माण रोकने के आदेश जारी करने के निर्देश दिए हैं। मामले में पुलिस की कार्यप्रणाली भी अदालत के निशाने पर रही। उच्च न्यायालय ने एफआईआर में निर्माण से जुड़े संदिग्धों और आरोपितों के नाम दर्ज नहीं किए जाने पर गंभीर चिंता जताई। अदालत ने कहा कि पहले के आदेश में नाम सामने आने के बावजूद एफआईआर में उन्हें अज्ञात बताया गया है।
मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति जीएस संधावालिया और न्यायमूर्ति बिपिन सी. नेगी की खंडपीठ ने यह आदेश जनहित याचिका पर सुनवाई के दौरान दिया। अदालत ने मामले की अगली सुनवाई 4 नवंबर 2026 को तय की है।
यह मामला बालूगंज और चक्कर के बीच दो बड़ी इमारतों में पांच से छह मंजिल से अधिक निर्माण किए जाने की शिकायत के बाद सामने आया। अदालत ने पहले जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के सचिव को वन विभाग के अधिकारियों और शिमला नगर निगम आयुक्त के साथ मौके का निरीक्षण करने के निर्देश दिए थे। उनसे निर्माण की मंजूरी, जमीन की प्रकृति और संबंधित सड़क के निर्माण की अनुमति के बारे में रिपोर्ट मांगी गई थी।
जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के सचिव की विस्तृत रिपोर्ट में निर्माण और हरित क्षेत्र में कथित अनधिकृत कटौती का उल्लेख किया गया। रिपोर्ट के साथ पेश तस्वीरों के अनुसार मौके पर एक इमारत छह स्तरों की बनाई गई है, जबकि दूसरी इमारत चार मंजिल की है और उसकी ढलानदार छत भी रहने योग्य है।
अदालत ने पाया कि छह स्तरों वाली इमारत सड़क के स्तर से सीधे ऊपर बनाई गई है। इससे घाटी का नजारा पूरी तरह बाधित हो रहा है। हाईकोर्ट ने इस निर्माण को हिमाचल प्रदेश नगर एवं ग्राम योजना नियमों के विनियम 31 का गंभीर उल्लंघन बताया। इन नियमों में वर्ष 2025 में चौदहवें संशोधन के तहत बदलाव किए गए थे।
रिपोर्ट के अनुसार निर्माण स्थल की तस्वीरें वर्ष 2020 की गूगल इमेजरी में भी दिखाई देती हैं। इससे निर्माण कार्य करीब पांच वर्षों से जारी होने की बात सामने आई है। रिपोर्ट में खसरा नंबर 425/1 और 425/2 में बड़ी संख्या में पेड़ काटे जाने और चार पेड़ों को जड़ से उखाड़े जाने का भी उल्लेख किया गया।
रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि 30 अगस्त, 2025 को अधिसूचित पहाड़ी क्षेत्रों में कटाई और खुदाई पर प्रतिबंध के बावजूद बरसात के मौसम में निर्माण कार्य किया गया।
अदालत ने रिपोर्ट में वन विभाग, शिमला नगर निगम और पुलिस विभाग की कार्यप्रणाली पर उठाए गए सवालों को गंभीरता से लिया। रिपोर्ट में इन विभागों की मौजूदगी में निर्माण और हरित क्षेत्र में कटौती होने पर चिंता जताई गई थी। हाईकोर्ट ने विस्तृत रिपोर्ट तैयार करने के लिए जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के सचिव के प्रयासों की सराहना की।
एफआईआर में आरोपितों के नाम की जगह ‘अज्ञात’, पुलिस पर हाईकोर्ट की टिप्पणी
मामले में पुलिस थाना बालूगंज के थाना प्रभारी ने अदालत में हलफनामा दाखिल कर बताया कि 12 अक्टूबर, 2026 को एफआईआर नंबर 216 दर्ज की गई थी। यह मामला भारतीय न्याय संहिता, 2023 की धारा 326(बी) और 125 के तहत दर्ज किया गया।
हालांकि, उच्च न्यायालय ने पाया कि एफआईआर में ज्ञात संदिग्धों और आरोपितों के नाम दर्ज करने के बजाय उन्हें ‘अज्ञात’ लिखा गया है। अदालत ने कहा कि पहले के आदेश में निर्माण स्थल पर कथित अनधिकृत निर्माण कर रही कंपनी मेसर्स तेनजिन कंस्ट्रक्शन प्राइवेट लिमिटेड के साथ संदिग्धों और आरोपितों के नाम भी दर्ज किए गए थे। इसके बावजूद एफआईआर में उनके नाम नहीं होने पर अदालत ने गंभीर चिंता जताई।
उच्च न्यायालय ने इस चूक को स्पष्ट और गंभीर बताते हुए कहा कि इससे पुलिस अधिकारियों की ओर से दोषियों को बचाने की जानबूझकर कोशिश किए जाने का संकेत मिलता है।
उच्च न्यायालय ने संबंधित स्थल पर आगे किसी भी तरह का निर्माण नहीं करने के निर्देश दिए हैं। अदालत ने शिमला नगर निगम को तत्काल निर्माण रोकने के आदेश जारी करने को कहा है। अदालत में मौजूद थाना प्रभारी को आदेश की प्रति संबंधित इमारतों में रह रहे लोगों तक पहुंचाने की जिम्मेदारी दी गई है।
थाना प्रभारी ने अदालत को आश्वासन दिया कि एफआईआर में आरोपितों के नाम दर्ज किए जाएंगे और जल्द से जल्द जांच की जाएगी। अदालत ने पुलिस को अगली सुनवाई पर स्थिति रिपोर्ट पेश करने के निर्देश दिए हैं। रिपोर्ट में अब तक की गई कार्रवाई का ब्योरा देना होगा।
