हमीरपुर : रविवार को होगी अनूठी प्रथा की पानी में रामलीला

Share

हमीरपुर, 25 अक्टूबर । उत्तर प्रदेश के हमीरपुर जिले में रविवार की रात जलविहार महोत्सव में बड़े तालाब में रविवार को रामलीला और श्रीकृष्ण लीला का मनमोहन सजीव मंचन किया जायेगा। सैकड़ों साल पुरानी अनूठी परम्परा को देखने के लिये तालाब के किनारे हजारों लोगों की भीड़ भी जुटेगी। इसके लिये ग्राम पंचायत स्तर पर तैयारियां पूरी कर ली गई है ।

जिले के सरीला तहसील क्षेत्र के पवई गांव में करीब चार सौ साल से अधिक पुरानी परम्परा में गांव की महिलायें और पुरुष ही रामलीला और श्रीकृष्ण लीला का मंचन करती हैं। शरद पूर्णिमा पर इस गांव में एतिहासिक जलविहार महोत्सव की धूम मचेगी। तालाब में पानी में सजीव राम और श्रीकृष्ण लीला के मंचन से पहले दिन में गांव में शंकर जी की बारात निकाली जायेगी। बारात की शोभायात्रा पूरे गांव की गलियों से घुमाते हुये एतिहासिक तालाब के पास इसका समापन होगा। दिन में रामलीला का मंचन पानी में होगा फिर पूरी रात तालाब के पानी में ही श्रीकृष्ण की लीला का सजीव मंचन किया जायेगा। पानी में अनूठी लीला सम्पन्न कराने के लिये कई बड़ी नावों की व्यवस्था की गयी हैं।

पानी में यह अनोखी लीला रात भर चलेगी जिसमें कंस वध, पूतना वध व बकासुर जैसे राक्षसों का वध करने की लीला का मंचन किया जायेगा। तालाब में यह लीला अपने आप में अद्भुत रहती है जिसे देखने के लिये रात भर ग्रामीणों की भीड़ जुटती हैं।

पवई गांव के ग्राम प्रधान प्रतिनिधि रामगोपाल ने बताया कि पानी में ही रामलीला और श्रीकृष्ण लीला का सजीव मंचन हमीरपुर के अलावा कहीं और देखने को नहीं मिलता है। इसी तरह से जिले के कुरारा क्षेत्र के भैसापाली गांव में जलविहार महोत्सव की धूम रातभर रही। लाला हरदौल के स्वरूप का चित्रण किया गया। इसके अलावा टेशू, झिंझियां और सुआटा की लीलायें होगी जो कातिक मास तक चलेगी। इसमें सुआटा राक्षस को मार कर टेशू झिंझियां से शादी करेगा। शादी होते ही यह महोत्सव सम्पन्न हो जायेगा।

बुन्देलखण्ड की अनूठी प्रथा है जलविहार महोत्सवपवई गांव के सरपंच आशा देवी के पति रामगोपाल ने बताया कि बुन्देलखण्ड के हमीरपुर में यह कार्यक्रम 400 से अधिक सालों से बीच तालाब के पानी में ही आयोजित होता है। उन्होंने बताया कि रामलीला, श्रीकृष्ण लीला का सजीव मंचन पानी में करने की परम्परा है जिसमें गांव के लोग ही अभिनव करते है। यह कार्यक्रम रात भर चलेंगे जिसे देखने के लिये आसपास के दर्जनों गांवों से भारी संख्या में लोगों की भीड़ जुटती हैं। इस एतिहासिक परम्परा की लीला को लेकर जरिया थाने से पुलिस बल की भी तैनाती होती हैं।

गांव के प्रधान प्रतिनिधि रामगोपाल ने बताया कि अबकी बार एतिहासिक लीला सम्पन्न कराने के लिये दो लाख रुपये की व्यवस्था की गयी हैं। उन्होंने बताया कि गांव के डा.मंगल सिंह कंस का अभिनय करेंगे वहीं खेमचद्र राजपूत कालिया नाग, शिवप्रसाद पूतना व अमरचन्द्र राजपूत बकासुर दैत्य का अभिनय करेंगे। इसके अलावा इन्द्रेश सिंह श्रीकृष्ण बनेंगे। सूरज प्रसाद को शंकर जी का अभिनय करने की जिम्मेदारी दी गयी हैं। सभी लोगों ने अपने-अपने अभिनयों की तैयारी शुरू कर दी हैं।

गुब्बारे से उड़ाए जायेगे ईनामी कूपन गांव की सरपंच श्रीमती आशा देवी व उनके पति रामगोपाल ने बताया कि एक गुब्बारे से आसमान में कूपन उड़ाकर इस पुरानी परम्परा का आगाज किया जायेगा। गुब्बारे में दो हजार रुपये का ईनामी कूपन रखा जायेगा। उन्होंने बताया कि जो भी व्यक्ति ये कूपन पायेगा उसे पुरस्कृत किया जायेगा साथ ही आने जाने का किराया भी दिया जायेगा। सरपंच ने बताया कि ईनामी कूपन का गुब्बारा करीब तीन किमी की दूरी पर गिरता हैं। जो भाग्यशाली होगा उसे रामलीला और जलविहार संपन्न के होंने के बाद अगले दिन पुरस्कृत कर विदा किया जायेगा।