नई दिल्ली, 02 अक्टूबर । घरेलू सर्राफा बाजार में हाजिर चांदी ने आज जबरदस्त गोता लगाया है। शुरुआती कारोबार में इस चमकीली धातु की कीमत में 12,700 रुपये प्रति किलोग्राम से लेकर 13,200 रुपये प्रति किलोग्राम की गिरावट दर्ज की गई है। चांदी के भाव में आई इस जोरदार गिरावट के कारण देश के अलग-अलग हिस्सों में चांदी आज 2,26,800 रुपये प्रति किलोग्राम से लेकर 2,32,000 रुपये प्रति किलोग्राम तक के भाव पर बिक रही है।
दिल्ली सर्राफा बाजार में चांदी आज 12,900 रुपये प्रति किलोग्राम फिसल गई, जिसके कारण ये चमकीली धातु आज 2,27,000 रुपये प्रति किलोग्राम के स्तर पर कारोबार कर रही है। इसी तरह मुंबई, अहमदाबाद और कोलकाता में चांदी 2,26,800 रुपये के भाव पर कारोबार कर रही है। जबकि जयपुर, सूरत और पुणे में चांदी 2,27,100 रुपये प्रति किलोग्राम के स्तर पर बनी हुई है।
बेंगलुरु में चांदी 2,27,300 रुपये के स्तर पर और पटना तथा भुवनेश्वर में 2,26,900 प्रति किलोग्राम के स्तर पर कारोबार कर रही है। इसके अलावा हैदराबाद में चांदी 13,100 रुपये प्रति किलोग्राम की कमजोरी के साथ 2,31,700 रुपये प्रति किलोग्राम के स्तर पर बिक रही है। आज देश में चांदी की सबसे अधिक कीमत चेन्नई में है, जहां ये चमकीली धातु आज 13,200 रुपये प्रति किलोग्राम सस्ती होकर 2,32,000 रुपये प्रति किलोग्राम के स्तर पर आ गई है।
मार्केट एक्सपर्ट मयंक मोहन का कहना है कि पश्चिम एशिया में जारी तनाव ने मार्केट के सभी समीकरणों को पलट दिया है। बाजार में अनिश्चितता का माहौल बना हुआ है, जिसकी वजह से सबसे सुरक्षित इनवेस्टमेंट इंस्ट्रुमेंट समझे जाने वाली सोना और चांदी जैसी धातुओं के भाव में भी अंतरराष्ट्रीय बाजार में लगातार उतार चढ़ाव हो रहा है।
मयंक मोहन के अनुसार भारत अपनी जरूरत का करीब 85 प्रतिशत सोना अंतरराष्ट्रीय बाजार से खरीदता है। इसी तरह चांदी की मांग को भी पूरा करने के लिए करीब 80 प्रतिशत आयात का सहारा लेना पड़ता है। यही कारण है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में होने वाला कोई भी उतार-चढ़ाव सीधे भारतीय बाजार में भी कीमत पर असर डालता है। पिछले एक सप्ताह के दौरान अंतरराष्ट्रीय बाजार में चांदी की कीमत 65.50 डॉलर प्रति औंस से गिर कर 61.07 डॉलर प्रति औंस तक आ गई है। इस गिरावट के कारण ही भारतीय बाजार में भी ये चमकीली धातु सस्ती हो गई है।
मयंक मोहन के मुताबिक जियो-पॉलिटिकल टेंशन की वजह से फिलहाल इस चमकीली धातु की इंडस्ट्रियल डिमांड में काफी गिरावट आ गई है, लेकिन ये स्थिति लंबे समय तक नहीं टिक सकती है। सामान्य जरूरतों को भी पूरा करने के लिए युद्ध में शामिल पक्षों को भी औद्योगिक गतिविधियों में तेजी लाने के लिए मजबूर होना पड़ेगा। वैसी स्थिति में चांदी एक बार फिर सरपट चाल पकड़ सकती है।