देहरादून, 07 अगस्त । दून पुस्तकालय एवं शोध केंद्र में शुक्रवार को हिमालय के दुर्गम उच्च पर्वतीय दर्रे ऑडेन्स कोल पर आधारित सचित्र व्याख्यान का आयोजन किया गया। पर्वतारोही एवं हिमालय प्रेमी सुनील नेहरू ने अपने आरोहण अभियान के अनुभवों, संस्मरणों और छायाचित्रों के माध्यम से श्रोताओं को उच्च हिमालय की रोमांचक दुनिया से परिचित कराया।
सुनील नेहरू ने बताया कि समुद्र तल से करीब 17,600 फीट की ऊंचाई पर स्थित ऑडेन्स कोल गंगोत्री-III और जोगिन-I चोटियों के बीच स्थित एक महत्वपूर्ण उच्च हिमालयी दर्रा है,जो रुद्रगैरा घाटी को केदारनाथ क्षेत्र की भिलंगना घाटी से जोड़ता है। उन्होंने कहा कि कठिन भूगोल, ग्लेशियरों, बर्फीली ढलानों और चुनौतीपूर्ण मार्ग के कारण यह भारतीय हिमालय के सबसे कठिन ट्रेकिंग मार्गों में शामिल है।
उन्होंने कहा कि ऑडेन्स कोल तक पहुंचना केवल एक पर्वतारोहण अभियान नहीं, बल्कि हिमालय की विराटता,उसकी संवेदनशील पारिस्थितिकी और प्राकृतिक विविधता को निकट से समझने का अवसर भी है। उन्होंने अभियान के दौरान बदलते मौसम, ग्लेशियरों, दुर्गम रास्तों और अन्य चुनौतियों का विस्तार से उल्लेख किया और छायाचित्रों के माध्यम से क्षेत्र की भौगोलिक संरचना और प्राकृतिक सौंदर्य को प्रस्तुत किया।
कार्यक्रम में ऑडेन्स कोल के इतिहास पर भी प्रकाश डाला गया। बताया गया कि इस दर्रे का नाम जॉन बिकनेल ऑडेन के नाम पर रखा गया, जिन्होंने वर्ष 1939 में भारतीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण के दौरान इस क्षेत्र का सर्वेक्षण किया था।
कार्यक्रम की शुरुआत में दून पुस्तकालय एवं शोध केंद्र के कार्यक्रम अधिकारी चन्द्रशेखर तिवारी ने कहा कि हिमालय को केवल भौगोलिक क्षेत्र के रूप में नहीं, बल्कि उसकी प्रकृति, संस्कृति और पर्यावरणीय दृष्टि से भी समझने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि ऐसे कार्यक्रम युवाओं में हिमालय के प्रति जिज्ञासा और संवेदनशीलता विकसित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
इस अवसर पर पुस्तकालयाध्यक्ष डी.के.पाण्डे सहित बड़ी संख्या में प्रकृति प्रेमी,लेखक, साहित्यकार,बुद्धिजीवी,पत्रकार,युवा पाठक और पुस्तकालय के सदस्य उपस्थित रहे।
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