नई दिल्ली, 25 अगस्त । उच्चतम न्यायालय ने झारखंड के दोहरे हत्याकांड में करीब 45 साल तक चली कानूनी लड़ाई को न्यायिक व्यवस्था की विफलता बताया है। जस्टिस जेबी पारदीवाला की अध्यक्षता वाली बेंच ने 70 वर्षीय साइमन सोरेन की सजा को निलंबित करते हुए तत्काल रिहा करने का आदेश दिया।
यह मामला 1981 में दुमका में हुई दो लोगों की हत्या का था। इस मामले के छह आरोपितों में से पांच की अलग-अलग समय में मौत हो गई। 1991 में आरोप तय होने के बाद मामले का ट्रायल पूरा होने में ही 12 साल लगे। मामले को 11 सालों में पांच बार एक अदालत से दूसरी अदालत में भेजा गया। उच्चतम न्यायालय तक आते-आते और उस पर फैसला होने तक 45 साल लग गए।
उच्चतम न्यायालय ने कहा कि आरोपितों को पहले 22 साल लंबे मुकदमे का सामना करना पड़ा। दोषसिद्धि के बाद अपील खारिज होने में भी 22 साल और दो महीने लग गए।