लखनऊ, 24 अगस्त । उत्तर प्रदेश विधानसभा के अध्यक्ष सतीश महाना ने कहा कि विधायिका लोकतंत्र की सबसे महत्वपूर्ण संस्थाओं में से एक है और इसकी गरिमा बनाए रखना सभी जनप्रतिनिधियों की सामूहिक जिम्मेदारी है। पिछले कई दशकों में विधायिका की गरिमा को लेकर जो गिरावट आई है, उसे बदलने के लिए निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि बदलते समय के साथ विधायकों को तकनीक की समझ विकसित करनी होगी, क्योंकि आज जनप्रतिनिधियों का सार्वजनिक जीवन डिजिटल माध्यमों से भी जुड़ा हुआ है।
होटल सेन्ट्रम में सोमवार को विधानसभा सदस्यों के लिए आयोजित “साइबर सुरक्षा : ए डिजिटल सिक्योरिटी ब्रीफिंग फॉर लेजिस्लेटर्स” की तीसरी कार्यशाला को संबोधित करते हुए महाना ने कहा कि सोशल मीडिया जनता से संवाद का प्रभावी माध्यम है, लेकिन इसके इस्तेमाल में संयम और सतर्कता बेहद जरूरी है। सोशल मीडिया पर आने वाली हर सूचना को सही मान लेना उचित नहीं है। उन्होंने विधायकों से कहा कि यदि कोई नकारात्मक, आपत्तिजनक या अनावश्यक पोस्ट सामने आती है तो उस पर प्रतिक्रिया देने के बजाय उसे तत्काल ब्लॉक कर दें। जनप्रतिनिधियों को अपनी डिजिटल छवि के साथ-साथ विधायिका की गरिमा का भी ध्यान रखना चाहिए।
महाना ने कहा कि आज साइबर सुरक्षा केवल तकनीकी विशेषज्ञों का विषय नहीं रह गया है। मोबाइल फोन, सोशल मीडिया और डिजिटल माध्यमों के बढ़ते इस्तेमाल के साथ प्रत्येक व्यक्ति को साइबर सुरक्षा की बुनियादी जानकारी होना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि एक योग्य विधायक केवल सदन की कार्यवाही और अपने क्षेत्र की समस्याओं को समझने वाला ही नहीं, बल्कि समय के साथ बदलती चुनौतियों को समझने और उनसे निपटने में सक्षम भी होना चाहिए।
वित्त मंत्री सुरेश कुमार खन्ना ने कहा कि तकनीक बहुत तेजी से आगे बढ़ रही है और उसी के साथ साइबर अपराध के तरीके भी बदल रहे हैं। उन्होंने कहा कि आज हर क्षेत्र में साइबर अपराध और डिजिटल फ्रॉड का दुरुपयोग देखने को मिल रहा है। इससे बचने के लिए जानकारी और जागरूकता सबसे महत्वपूर्ण हथियार हैं। उन्होंने कार्यशाला को अत्यंत उपयोगी बताते हुए कहा कि यहां दी जा रही जानकारी केवल विधायकों के सार्वजनिक जीवन के लिए ही नहीं, बल्कि उनकी रोजमर्रा की जरूरतों के लिए भी महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि नई पीढ़ी तकनीक के मामले में हमारी पीढ़ी की तुलना में अधिक जानकार है, इसलिए हमें भी लगातार सीखते रहना होगा।
देश के जाने-माने साइबर विशेषज्ञ अमित दुबे ने विधायकों को साइबर दुनिया में तेजी से बदल रहे खतरों की वास्तविक तस्वीर से अवगत कराया। उन्होंने कहा कि साइबर अपराधी अब केवल बैंक खातों या मोबाइल फोन को निशाना नहीं बनाते, बल्कि जनप्रतिनिधियों की डिजिटल पहचान, सोशल मीडिया अकाउंट और सार्वजनिक छवि को भी प्रभावित करने का प्रयास कर सकते हैं। उन्होंने संदिग्ध लिंक, अनजान कॉल, फर्जी संदेश, भ्रामक सोशल मीडिया पोस्ट और आकर्षक डिजिटल प्रस्तावों के प्रति सावधानी बरतने की सलाह दी।