अखाड़ा परिषद में 14वें अखाड़े को नहीं मिलेगा स्थान: करौली - सरस जनवाद

अखाड़ा परिषद में 14वें अखाड़े को नहीं मिलेगा स्थान: करौली

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हरिद्वार, 25 जुलाई । किन्नर अखाड़ा, वाल्मीकि अखाड़ा और अन्य सामाजिक अखाड़ों के गठन की चर्चाओं के बीच अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद ने अपना रुख स्पष्ट कर दिया है।

शनिवार को पत्रकारों से वार्ता करते हुए परिषद के मीडिया संपर्क प्रमुख एवं श्री पंचायती अखाड़ा नया उदासीन के महामंडलेश्वर करौली शंकर दास जी महाराज ने कहा कि परिषद अखाड़े की प्राचीन परम्पराओं की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में किसी भी वर्ग को अपना अखाड़ा या संगठन बनाने का अधिकार है। किन्नर अखाड़ा बने या वाल्मीकि अखाड़ा, परिषद को कोई आपत्ति नहीं है। इन्हें अखाड़ों का संरक्षण भी मिल सकता है, लेकिन अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद में 14वें अखाड़े का प्रवेश संभव नहीं है।

उन्होंने कहा कि हमारे महापुरुषों द्वारा स्थापित 13 अखाड़े ही रहेंगे। 13 अखाड़ों के मूल ढांचे में किसी नए अखाड़े को स्थान यह 13 अखाड़े कभी स्वीकार नहीं करेंगे। इस सनातन परंपरा को बिखरने नहीं दिया जाएगा। इसके लिए सभी अखाड़े एकजुट हैं।

कहा कि महाकुंभ और अर्धकुंभ में अमृत स्नान का क्रम प्राचीन परंपराओं और आपसी सहमति पर आधारित है। यह शासन प्रशासन के दस्तावेजों में भी दर्ज है।

इसमें किसी बदलाव की गुंजाइश नहीं है। यदि भविष्य में कभी विचार विमर्श की जरूरत हुई तो वह भी केवल 13 अखाड़ों की सर्वसम्मति से ही होगा।

उन्होंने संतों से अपील की कि संयम और मर्यादा के साथ बयान दें। प्राचीन परंपराओं की मर्यादा बनाए रखना हमारी सर्वोच्च जिम्मेदारी है।