आज के दौर में ऐसी पारिवारिक कॉमेडी फिल्में कम बनती हैं, जो सिर्फ हंसाने तक सीमित न रहें, बल्कि एक सार्थक संदेश भी दें। निर्देशक रविंदर सिवाच की ‘उत्तर दा पुत्तर’ इसी श्रेणी की फिल्म है। यह कहानी एक ऐसे फिजिक्स प्रोफेसर की है, जो विज्ञान पढ़ाता है, लेकिन अपनी निजी जिंदगी में हर फैसले के लिए वास्तु, शुभ-अशुभ और टोटकों पर आंख मूंदकर भरोसा करता है। यही विरोधाभास फिल्म को रोचक बनाता है और कई मजेदार परिस्थितियों को जन्म देता है।
कहानी
दिल्ली के फिजिक्स प्रोफेसर साई राम टुटेजा (अन्नू कपूर) का मानना है कि जीवन की हर समस्या का समाधान सही वास्तु में छिपा है। वह अपने परिवार के लिए एक आदर्श घर की तलाश करते हैं और आखिरकार उन्हें ऐसा घर मिल भी जाता है। गृह प्रवेश के कुछ ही समय बाद एक हादसा सब कुछ बदल देता है। इसके बाद पत्नी गिन्नी (रुखसार रहमान) उनसे नाराज होकर घर छोड़ देती है। अपना परिवार वापस पाने के लिए साई राम अपने दोस्त मन्नू (बृजेंद्र काला) के साथ निकल पड़ते हैं। इस सफर में कई मजेदार किरदार और हास्यास्पद घटनाएं सामने आती हैं। कहानी हल्के-फुल्के अंदाज में यह सवाल भी उठाती है कि जिंदगी कर्म से चलती है या अंधविश्वास से।
निर्देशन
रविंदर सिवाच ने अपने निर्देशन में कहानी को सरल और मनोरंजक बनाए रखा है। फिल्म कहीं भी उपदेशात्मक नहीं लगती, बल्कि हास्य के जरिए अपनी बात कहती है। दिल्ली का स्थानीय माहौल, भाषा और किरदार फिल्म को वास्तविकता का एहसास कराते हैं। हालांकि कुछ जगह कहानी की रफ्तार थोड़ी धीमी पड़ती है, लेकिन मनोरंजन का सिलसिला बना रहता है।
अभिनय
अन्नू कपूर फिल्म की सबसे बड़ी ताकत हैं। उनकी कॉमिक टाइमिंग, संवाद अदायगी और हाव-भाव दर्शकों को लगातार हंसाते हैं। भावनात्मक दृश्यों में भी उनका अभिनय प्रभाव छोड़ता है। रुखसार रहमान ने सहज अभिनय किया है। पवन मल्होत्रा अपने खास अंदाज से कई दृश्यों में जान डालते हैं। बृजेंद्र काला हमेशा की तरह शानदार हैं। जीवेशु अहलूवालिया अपनी कॉमिक टाइमिंग से प्रभावित करते हैं, जबकि इश्तियाक खान, राजेंद्र सेठी, सुमित गुलाटी और नितिन अरोड़ा भी अपनी भूमिकाओं के साथ न्याय करते हैं।
तकनीकी पक्ष
फिल्म का बैकग्राउंड स्कोर कहानी के साथ अच्छा तालमेल बिठाता है। सिनेमैटोग्राफी साधारण लेकिन प्रभावी है। संपादन कसा हुआ है, हालांकि दूसरे हाफ में कुछ दृश्यों को थोड़ा छोटा किया जा सकता था। संवाद फिल्म की सबसे बड़ी ताकतों में से एक हैं, जो कई जगह खुलकर हंसाते हैं।
फाइनल वर्डिक्ट
‘उत्तर दा पुत्तर’ एक साफ-सुथरी पारिवारिक कॉमेडी है, जो हंसी के साथ एक जरूरी संदेश भी देती है। फिल्म मनोरंजन करते हुए अंधविश्वास और तर्क के बीच फर्क समझाने की कोशिश करती है। अन्नू कपूर का शानदार अभिनय, मजेदार किरदार और हल्का-फुल्का हास्य इसे पूरे परिवार के साथ देखने लायक बनाता है। अगर आप ऐसी फिल्में पसंद करते हैं, जिनमें कॉमेडी के साथ भावनाएं और सकारात्मक संदेश भी हो, तो ‘उत्तर दा पुत्तर’ इस सप्ताह एक अच्छा विकल्प साबित हो सकती है।