शिमला, 09 जुलाई । हिमाचल प्रदेश सरकार ने 15 मई 2003 से पहले विज्ञापित पदों या रिक्तियों के विरुद्ध सरकारी विभागों में भर्ती हुए कर्मचारियों के लिए बड़ा फैसला लिया है। सरकार ने कहा है कि ऐसे कर्मचारियों को केंद्रीय सिविल सेवा (पेंशन) नियम, 1972 [सीसीएस (पेंशन) रूल्स, 1972] के दायरे में लाया जाएगा।
इसके साथ ही वर्तमान में सेवा दे रहे कर्मचारियों के राष्ट्रीय पेंशन प्रणाली (एनपीएस) खाते में जमा उनके अंशदान को सामान्य भविष्य निधि (जीपीएफ) खाते में स्थानांतरित किया जाएगा। इस राशि पर जीपीएफ की निर्धारित दर से ब्याज भी दिया जाएगा। प्रदेश सरकार के एक प्रवक्ता ने वीरवार को कहा कि वर्तमान कांग्रेस सरकार ने सत्ता में आने के बाद कर्मचारियों के लिए सबसे पहले पुरानी पेंशन व्यवस्था बहाल करने का निर्णय लिया था। इसके तहत 1 अप्रैल 2023 से पुरानी पेंशन व्यवस्था लागू की गई और इसे प्रभावी बनाने के लिए वित्त विभाग ने 4 मई 2023 को अधिसूचना जारी की थी। प्रवक्ता ने कहा कि सरकार कर्मचारी हितों को प्राथमिकता देते हुए लगातार फैसले ले रही है।
इसी क्रम में अब यह निर्णय लिया गया है कि 15 मई 2003 से पहले विज्ञापित पदों या रिक्तियों के आधार पर सरकारी सेवा में आए कर्मचारियों को सीसीएस (पेंशन) रूल्स, 1972 के तहत लाभ दिया जाएगा। वर्तमान में सेवा दे रहे ऐसे कर्मचारियों के एनपीएस खाते में जमा कर्मचारी अंशदान को उनके जीपीएफ खाते में जमा किया जाएगा और उस पर जीपीएफ की दर से ब्याज मिलेगा। सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि जो कर्मचारी सेवानिवृत्त हो चुके हैं और इस श्रेणी में आते हैं, उन्हें भी सीसीएस (पेंशन) रूल्स, 1972 के तहत उनकी सेवानिवृत्ति की तिथि से पेंशन का लाभ मिलेगा। सरकार का कहना है कि इस निर्णय से 15 मई 2003 से पहले विज्ञापित पदों या रिक्तियों के विरुद्ध भर्ती हुए प्रदेश के हजारों कर्मचारियों और सेवानिवृत्त कर्मियों को लाभ मिलेगा।