नई दिल्ली, 06 जुलाई । दिल्ली उच्च न्यायालय ने फिल्म ‘काला हिरण-द बैटल फॉर लीगेसी’ की रिलीज पर रोक लगाने की मांग करने वाली याचिका पर सुनवाई करते हुए फिल्म अभिनेता सलमान खान से पूछा है कि क्या व्यक्तित्व के अधिकार फिल्म के प्रमोशन वाले कंटेट तक भी अपना दायरा रखते हैं। जस्टिस ज्योति सिंह की बेंच ने मामले की अगली सुनवाई कल यानि 7 जुलाई को करने का आदेश दिया।
सोमवार को सुनवाई के दौरान सलमान खान की ओर से पेश वकील रवि प्रकाश ने फिल्म और उसके ट्रेलर पर रोक की मांग करते हुए कहा कि फिल्म के निर्माता उसके व्यक्तित्व का बिना किसी सहमति के वाणिज्यिक दुरुपयोग कर रहे हैं। तब कोर्ट ने कहा कि आप कोई सीधा संबंध बताइए जिससे फिल्म और सलमान खान में कोई संबंध पता चले। तब रवि प्रकाश ने सलमान खान के ब्रेसलेट पहनने का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि फिल्म के निर्माता ने इंटरव्यू में कहा है कि ये फिल्म सलमान खान पर आधारित है। तब कोर्ट ने कहा कि कोई ब्रेसलेट पहनता है, कोई पगड़ी पहनता है तो कल आप ये कहेंगे कि ये व्यक्तित्व के अधिकारों का मामला है। आप फिल्म से सलमान खान का सीधा संबंध बताइए। तब रवि प्रकाश ने फिल्म निर्माता के इंटरव्यू और सोशल मीडिया के पोस्ट का जिक्र किया। तब कोर्ट ने उनकी दलीलों को रोकते हुए कहा कि हम केवल याचिका में लिखी गई प्रार्थनाओं पर ही विचार करेंगे। उसके बाद कोर्ट ने फिल्म निर्माता से सलमान खान के वकील को वो वीडियो दिखाने को कहा, जिस पर वो भरोसा करते हैं, ताकि उस वीडियो की सत्यता का वेरिफिकेशन हो सके।
याचिका में सलमान खान ने कहा है कि ये फिल्म 1998 में उनसे जुड़े काला हिरण के शिकार से संबंधित है और इस फिल्म के प्रदर्शन से उनके व्यक्तित्व के अधिकारों का उल्लंघन होगा। याचिका में कहा गया है कि फिल्म काला हिरण के निर्माता ने फिल्म में उसके हमशक्ल का इस्तेमाल किया है और वह जो ब्रेसलेट पहनते हैं वैसा ही ब्रेसलेट भी पहने हुए दिखाया गया है। याचिका में कहा गया है कि फिल्म के निर्माता फिल्म के प्रमोशन के दौरान सलमान खान के नाम का दुरुपयोग कर रहे हैं। याचिका में कहा गया है कि फिल्म की रिलीज के बाद काला हिरण के शिकार से जुड़े मामले पर भी असर पड़ सकता है और इससे उनकी छवि पर खराब असर पड़ सकता है।
याचिका में कहा गया है कि सलमान खान ने फिल्म के निर्माता को कानूनी नोटिस भेजा था, जिसमें फिल्म के प्रमोशन और रिलीज को रोकने की मांग की गई थी। कानूनी नोटिस में कहा गया था कि काला हिरण के शिकार का मामला अभी राजस्थान उच्च न्यायालय में लंबित है। ऐसे में अगर इस मामले में कोई भी सनसनी पैदा की जाएगी, तो केस के ट्रायल पर असर पड़ सकता है।