कोच्चि, 22 जून । रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (आरबीआई) के गवर्नर संजय मल्होत्रा ने सोमवार को कहा कि सूक्ष्म, लघु एवं मझोले उद्यमों (एमएसएमई) ‘‘उद्यमिता की नर्सरी’’ हैं और ‘विकसित भारत’ के विजन के लिए अहम हैं।
संजय मल्होत्रा ने कोच्चि में 27 जून को मनाए जाने वाले अंतरराष्ट्रीय एमएसएमई दिवस 2026 के सिलसिले में एमएसएमई उद्यमियों के लिए आयोजित एक खास जागरूकता कार्यक्रम के उद्घाटन के अवसर पर यह बात कही। आरबीआई के गवर्नर ने बैंकों से कहा कि वे एमएसएमई को लंबे समय के पार्टनर के तौर पर देखें।
आरबीआई के विशेष जागरूकता कार्यक्रम का उद्घाटन करते हुए संजय मल्होत्रा ने सूक्ष्म, लघु एवं मझोले उद्यमों (एमएसएमई) की आर्थिक वृद्धि को गति देने और रोजगार सृजन में इनकी भूमिका का उल्लेख किया। उन्होंने कोच्चि की उद्यमशीलता विरासत..मसाला व्यापार से लेकर पर्यटन, आयुर्वेद और प्लाईवुड उद्योगों तक की सराहना की और वित्तीय प्रौद्योगिकी (फिनटेक) तथा स्वच्छ ऊर्जा जैसे उभरते क्षेत्रों की ओर संकेत किया।
मल्होत्रा ने बैंकों से एमएसएमई को दीर्घकालिक भागीदार के रूप में देखने का आग्रह किया और आगामी ‘यूनिफाइड लेंडिंग इंटरफेस’ का उल्लेख किया, जिससे ऋण मूल्यांकन प्रक्रिया को सरल बनाने की उम्मीद है। उन्होंने उद्यमियों से टीआरईडीएस का अधिक उपयोग करने और वित्तीय अनुशासन तथा पारदर्शिता बनाए रखने का आह्वान किया।
कोच्चि के एक होटल में आयोजित इस कार्यक्रम में केरल भर से 150 से अधिक एमएसएमई उद्यमियों ने भाग लिया। इस कार्यक्रम में आरबीआई, वाणिज्यिक बैंकों, सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों, भारतीय लघु उद्योग विकास बैंक (सिडबी) और राज्य सरकार के वरिष्ठ अधिकारियों ने भी शिरकत की।