रांची, 18 जून । झारखंड में ग्रामीण विकास विभाग द्वारा निर्मित पुल-पुलियों के गिरने तथा जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई नहीं किए जाने से संबंधित जनहित याचिका पर गुरुवार को झारखंड उच्च न्यायालय में सुनवाई हुई। मामले की सुनवाई मुख्य न्यायाधीश एमएस सोनक और न्यायमूर्ति राजेश शंकर की खंडपीठ ने की।
जनहित याचिका दायर करने वाले पंकज कुमार यादव ने आरोप लगाया है कि ग्रामीण विकास विभाग की ओर से राज्य में निर्मित कई पुल-पुलियां ध्वस्त हो चुकी हैं, लेकिन जिम्मेदार अधिकारियों और एजेंसियों के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई है।
सुनवाई के दौरान अदालत ने ग्रामीण विकास विभाग के सचिव द्वारा निर्धारित समय पर शपथ पत्र दाखिल नहीं किए जाने पर कड़ी नाराजगी जताई। खंडपीठ ने विभागीय सचिव को अगली सुनवाई तक विस्तृत शपथ पत्र दाखिल करने का निर्देश दिया है। अदालत ने पूछा है कि राज्य में विभाग की ओर से बनाए गए कितने पुल और पुलियां गिरी हैं, इन मामलों में किन अधिकारियों या एजेंसियों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई की गई है तथा आरोपितों पर क्या दंडात्मक कदम उठाए गए हैं।
अदालत ने मामले की अगली सुनवाई 2 जुलाई को निर्धारित की है। इस दौरान सचिव ग्रामीण विकास विभाग को सभी आवश्यक तथ्यों और कार्रवाई का विस्तृत ब्यौरा प्रस्तुत करना होगा।
सुनवाई के दौरान अदालत ने इस बात पर भी असंतोष व्यक्त किया कि उसके पूर्व आदेश के बावजूद विभागीय सचिव की ओर से शपथ पत्र दाखिल नहीं किया गया और उनकी जगह मुख्य अभियंता ने शपथ पत्र प्रस्तुत किया। इस पर खंडपीठ ने मौखिक टिप्पणी करते हुए पूछा कि क्या विभागीय सचिव को अदालत के आदेश की जानकारी नहीं थी।
अदालत ने कहा कि फरवरी 2026 में पारित आदेश में स्पष्ट रूप से ग्रामीण विकास विभाग के सचिव से जवाब तलब किया गया था। ऐसे में सचिव की बजाय मुख्य अभियंता द्वारा शपथ पत्र दाखिल किया जाना न्यायालय के आदेश की अवहेलना माना जा सकता है। खंडपीठ ने यह भी टिप्पणी की कि यह मामला अवमानना की श्रेणी में भी आ सकता है।
उल्लेखनीय है कि राज्य में हाल के वर्षों में विभिन्न क्षेत्रों में पुल-पुलियों के क्षतिग्रस्त होने और निर्माण गुणवत्ता पर सवाल उठते रहे हैं। इसी संदर्भ में दायर जनहित याचिका पर उच्च न्यायालय गंभीरता से सुनवाई कर रहा है। अब सभी की निगाहें 2 जुलाई को होने वाली अगली सुनवाई और ग्रामीण विकास विभाग की ओर से प्रस्तुत किए जाने वाले विस्तृत जवाब पर टिकी हैं।————