नई दिल्ली, 15 मई । उच्चतम न्यायालय ने ऐसे लोगों की बढ़ती संख्या पर गहरी चिंता जताई है जो कथित तौर पर नकली या संदिग्ध डिग्रियों के साथ वकालत कर रहे हैं। सीनियर वकीलों के डेजिग्नेशन से जुड़ी एक याचिका पर सुनवाई करते हुए चीफ जस्टिस सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा कि ऐसा लगता है कि वकीलों के लिबास में हजारों ऐसे लोग हैं जिनकी योग्यता संदिग्ध है।
चीफ जस्टिस ने कहा कि बेरोजगार युवा कॉकरोच की तरह होते हैं। उन्होंने कहा कि ऐसे कई बेरोजगार युवा जिन्हें न तो रोजगार मिलता है और न ही पेशे में कोई ठिकाना तो वे आगे चलकर मीडिया, सोशल मीडिया, आरटीआई एक्टिविस्ट या अन्य तरह के एक्टिविस्ट बन जाते हैं और पूरे सिस्टम पर हमला करने लग जाते हैं। कोर्ट ने कहा कि कुछ वकीलों खासकर दिल्ली में लॉ डिग्रियों की प्रामाणिकता की सीबीआई जांच की जरुरत है।
दरअसल, उच्चतम न्यायालय में एक वकील ने याचिका दायर की थी जिसमें मांग की गई थी कि दिल्ली उच्च न्यायालय उन्हें सीनियर वकील का दर्जा दे। लेकिन उन वकील के पेशेवर आचरण और सोशल मीडिया पर उनके द्वारा इस्तेमाल की गई भाषा को देखकर अदालत बहुत नाराज हो गई। चीफ जस्टिस ने कहा कि अगर दिल्ली उच्च न्यायालय उन्हें यह दर्जा दे भी दे तो उच्चतम न्यायालय उसे रद्द कर देगा। उन्होंने वकील से पूछा कि क्या यह दर्जा कोई मेडल है जो सजावट के लिए रखा जाए। यह भी पूछा कि क्या ऐसे व्यक्ति को सीनियर एडवोकेट बनना चाहिए।