सूरजपुर : नेशनल लोक अदालत में 83 हजार से अधिक प्रकरणों का निराकरण

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सूरजपुर, 09 मई । राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण नई दिल्ली एवं छत्तीसगढ़ राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण बिलासपुर के मार्गदर्शन में जिला न्यायालय सूरजपुर में शनिवार काे वर्ष 2026 की द्वितीय नेशनल लोक अदालत का आयोजन सफलतापूर्वक सम्पन्न हुआ। इस दौरान लंबित एवं प्री-लिटिगेशन मामलों के निराकरण के लिए जिलेभर में 33 खण्डपीठों का गठन किया गया, जहां हजारों मामलों का आपसी सहमति से समाधान किया गया।

नेशनल लोक अदालत का शुभारंभ छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय बिलासपुर के मुख्य न्यायाधीश रमेश सिन्हा ने वर्चुअल माध्यम से किया। इसके बाद न्यायालय परिसर में प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश विनीता वार्नर एवं अन्य न्यायिक अधिकारियों की मौजूदगी में दीप प्रज्वलित कर कार्यक्रम की शुरुआत की गई। इस अवसर पर अधिवक्ता, न्यायिक कर्मचारी तथा बैंक, नगरपालिका और विद्युत विभाग सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी मौजूद रहे।

लोक अदालत में मोटर दुर्घटना दावा प्रकरणों में पीड़ित परिवारों को बड़ी राहत मिली। वर्षों से लंबित एक मामले में मृतक के परिजनों को 17 लाख 50 हजार रुपये का मुआवजा दिलाते हुए समझौता कराया गया। वहीं अन्य मामलों में 21 लाख, 13 लाख 50 हजार, 11 लाख तथा 6 लाख 70 हजार रुपये के समझौते हुए। विभिन्न खण्डपीठों में सैकड़ों लंबित मामलों का आपसी सहमति से निराकरण किया गया।

इस दौरान समाज कल्याण विभाग के सहयोग से ग्राम मसिरा निवासी दिव्यांग बालेश्वर सिंह को मोटराइज्ड ट्राय साइकिल भी प्रदान की गई। कुछ वर्ष पूर्व दुर्घटना में घायल होने के बाद वे चलने-फिरने में असमर्थ हो गए थे। ट्राय साइकिल मिलने पर उनके चेहरे पर खुशी साफ दिखाई दी।

लोक अदालत में सिविल वाद, मोटर दुर्घटना दावा, पारिवारिक विवाद, राजीनामा योग्य आपराधिक एवं राजस्व प्रकरणों के साथ-साथ बैंक ऋण, बिजली, टेलीफोन और जल कर से जुड़े प्री-लिटिगेशन मामलों की भी सुनवाई की गई। खण्डपीठों ने दोनों पक्षों के बीच सौहार्दपूर्ण समाधान निकालते हुए मामलों का त्वरित निराकरण किया।

आंकड़ों के अनुसार, लोक अदालत में 2587 लंबित एवं 92592 प्री-लिटिगेशन प्रकरण विचारार्थ रखे गए थे। इनमें से कुल 83580 प्रकरणों का सफलतापूर्वक निराकरण कर 5 करोड़ 9 लाख 33 हजार 428 रुपये का अवार्ड पारित किया गया। इससे हजारों पक्षकारों को राहत मिली।