पूर्वी सिंहभूम, 27 अप्रैल । चक्रधरपुर रेल मंडल में ट्रेनों की लगातार देरी को लेकर बढ़ते जनआक्रोश और सरयू राय के नेतृत्व में चल रहे आंदोलन के बीच सोमवार को रेलवे प्रशासन ने पहली बार अपनी स्थिति स्पष्ट की। टाटानगर में आयोजित प्रेस वार्ता में सीनियर डीसीएम आदित्य चौधरी ने कहा कि पिछले दो हफ्तों में ट्रेनों के परिचालन में सुधार दर्ज किया गया है और देरी को कम करने के लिए कई स्तरों पर लगातार निगरानी की जा रही है।
उन्होंने बताया कि पहले औसतन 120 मिनट तक विलंबित चल रही ट्रेनें अब 60 से 90 मिनट के भीतर नियंत्रित की जा रही हैं। रेलवे का लक्ष्य इसे और घटाकर 15 से 20 मिनट तक लाना है। आंकड़ों के अनुसार, वर्तमान में लगभग 65 प्रतिशत ट्रेनें समय पर चल रही हैं, जबकि 35 प्रतिशत ट्रेनों में देरी बनी हुई है। इसकी प्रमुख वजह अन्य रेल मंडलों से ट्रेनों का पहले से विलंबित होकर आना बताया गया है, जिसका सीधा असर पूरे परिचालन पर पड़ता है।
रेलवे अधिकारियों ने यह भी स्वीकार किया कि अनावश्यक चेन पुलिंग बड़ी समस्या बनी हुई है। मंडल में रोजाना 05 से 10 ट्रेनों में ऐसी घटनाएं सामने आती हैं, जिससे कई ट्रेनों का शेड्यूल प्रभावित होता है। इसके अलावा ट्रैक मेंटेनेंस के लिए लिए जा रहे ब्लॉक और भारी रेल यातायात भी समयबद्ध संचालन में बाधा बनते हैं। 26 अप्रैल के आंकड़ों का हवाला देते हुए बताया गया कि उस दिन 47 यात्री ट्रेनें और 67 मालगाड़ियां (अप-डाउन मिलाकर) संचालित हुईं, जिससे नेटवर्क पर दबाव स्पष्ट होता है।
इधर, ट्रेनों की देरी को लेकर रेलवे संघर्ष समिति के विघटन के बाद भी सरयू राय और उनके समर्थक लगातार आवाज उठा रहे हैं, जिससे रेलवे पर जवाब देने का दबाव बढ़ा है। अधिकारियों ने कहा कि स्थायी समाधान के लिए टाटानगर स्टेशन पर प्लेटफॉर्म विस्तार, लूप लाइन बढ़ाने और आधुनिक मॉनिटरिंग सिस्टम लागू करने की दिशा में काम तेज किया गया है। साथ ही, हाथियों के मूवमेंट वाले क्षेत्रों में सुरक्षा और गति नियंत्रण के बीच संतुलन बनाए रखते हुए ट्रेनों का संचालन किया जा रहा है।