प्रयागराज, 18 अप्रैल । एकीकृत बागवानी विकास मिशन कार्यक्रम अन्तर्गत केन्द्रीय उपोष्ण बागवानी संस्थान, रहमानखेडा, लखनऊ द्वारा आयोजित ‘अमरूद उत्पादकों का तकनीकी उन्नयन‘ विषयक एक दिवसीय कार्यशाला का शुभारम्भ इलाहाबाद उच्च न्यायालय के न्यायमूर्ति संजय कुमार पचौरी ने किया। उन्होंने अमरूद उत्पादक कृषकों को वैज्ञानिक की संज्ञा देते हुए कहा कि कृषक आधुनिक तकनीक अपनाकर प्रोफेशनल वैज्ञानिक होगें।
न्यायमूर्ति ने अपने उद्बोधन में भूमि की उर्वरा शक्ति को बढाने के लिए फसलों के अवशेषों को कम्पोस्ट के रूप में परिवर्तित करने का आवाहन किया। इसके साथ ही प्रयागराज, कौशाम्बी एवं फतेहपुर के सघन बागवानी हेतु अमरूद उत्पादकों को अवध भूषण व धवल प्रजाति के 25-25 कलमी पौधों का निःशुल्क वितरण भी किया।
कार्यक्रम के तकनीकी सत्र में केन्द्रीय उपोष्ण बागवानी संस्थान के प्रधान वैज्ञानिक डॉ कंचन कुमार श्रीवास्तव ने अमरूद सघन बागवानी, स्पेलियर तकनीक के विषय में अमरूद उत्पादकों को जानकारी दी। स्पेलियर तकनीक से पौधों की सधाई कर चार स्टेप में करने तथा नियमित प्रनिंग कर अच्छी कैनोपी बनाने पर जोर दिया। साथ ही डॉ दिनेश कुमार, प्रधान वैज्ञानिक, सी.आई.एस.एच. लखनऊ ने अमरूद फसल में जल प्रबन्धन एवं पोषण प्रबंधन पर चर्चा की।
उद्यान विभाग के संयुक्त निदेशक डॉ वीरेन्द्र सिंह ने औद्यानिक प्रयोग एवं प्रशिक्षण केन्द्र, खुशरूबाग में हो रहे उच्च गुणवत्ता के पौधों की जानकारी देते हुए बताया गया कि केन्द्र में 16 अमरूद की प्रजातियों के मातृ पौधों का चयन कर रोपण किया गया है। इनमें से यहां की विश्वविख्यात प्रजातियां इलाहाबाद सफेदा, एपिल कलर के अलावा नयी प्रजातियों में अवध भूषण रेड डायमन्ड, हिसार सफेदा, धवल, श्वेता, ललित, लालिमा आदि के पौधों को लगाकर आगामी वर्षो में उच्च गुणवत्ता के पौधों उपलब्ध कराये जायेगें।
कार्यक्रम का संचालन वी.के. सिंह, प्रभारी औद्यानिक प्रयोग एवं प्रशिक्षण केन्द्र, खुशरूबाग ने किया। इस अवसर पर डॉ जितेन्द्र प्रताप सिंह, डॉ हिमान्शु जगदीश प्रसाद, शुभम सिंह, संदीप सिंह, मनीष यादव, आकांक्षा पाल, अजय कुमार, विवेक श्रीवास्तव, अमित कुमार सिंह, सुरेश यादव, अखिलेश पाल आदि उपस्थित रहे।