झारखंड हाई कोर्ट ने पूर्व लघु सिंचाई विभाग के कर्मचारियों को पेंशन लाभ देने का दिया आदेश

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रांची, 14 अप्रैल । झारखंड उच्च न्यायालय ने लघु सिंचाई विभाग के पूर्व कर्मचारियों की पेंशन और अन्य सेवानिवृत्ति लाभ से जुड़े एक महत्वपूर्ण मामले में राज्य सरकार के खिलाफ बड़ा आदेश दिया है। अदालत ने नेशनल लोक अदालत के अवॉर्ड को लागू करने का निर्देश देते हुए सरकार को चार सप्ताह के भीतर सभी बकाया भुगतान करने को कहा है। साथ ही, बकाया राशि पर 6 प्रतिशत वार्षिक ब्याज देने का भी आदेश दिया गया है।

मुख्य न्यायाधीश एम.एस. सोनक और न्यायमूर्ति राजेश शंकर की खंडपीठ ने स्पष्ट किया कि लोक अदालत का अवॉर्ड अंतिम और बाध्यकारी होता है, इसलिए इसे लागू करना अनिवार्य है।

दरअसल,यह मामला लघु सिंचाई विभाग के पूर्व कर्मचारियों जुबली देवी सहित अन्य याचिकाकर्ताओं से जुड़ा है। उन्होंने वर्ष 2023 में झारखंड उच्च न्यायालय में रिट याचिका दायर कर मांग की थी कि उनकी पेंशन की गणना उनकी प्रारंभिक नियुक्ति की तारीख से की जाए, न कि नियमितीकरण की तिथि से।

बाद में यह विवाद राष्ट्रीय लोक अदालत में सुलझा, जहां 13 जुलाई 2024 को अवॉर्ड पारित किया गया। इस अवॉर्ड में राज्य सरकार को कर्मचारियों को पेंशन लाभ देने का निर्देश दिया गया था।

लोक अदालत के फैसले के बावजूद राज्य सरकार ने इसे लागू नहीं किया। न ही इसे किसी न्यायिक प्रक्रिया के तहत चुनौती दी गई। इसके बाद याचिकाकर्ताओं ने उच्च न्यायालय में अवमानना याचिका दाखिल की, लेकिन उसे समाप्त कर दिया गया।

इसके बाद उन्होंने वर्ष 2025 में एक नई रिट याचिका दायर की, जिसे भी खारिज कर दिया गया। अंततः इस आदेश के खिलाफ दायर अपील पर सुनवाई करते हुए उच्च न्यायालय ने यह अहम फैसला सुनाया।

अदालत ने आज कहा कि सरकार केवल तकनीकी आधार पर राहत से इनकार नहीं कर सकती और उसे अपने दायित्वों का पालन करना होगा। अदालत ने साफ किया कि लोक अदालत के अवॉर्ड का सम्मान करना सभी पक्षों के लिए अनिवार्य है।

अदालत ने सरकार को निर्देश दिया कि वह चार सप्ताह के भीतर अवॉर्ड को लागू करे और बकाया राशि का भुगतान 6 प्रतिशत वार्षिक ब्याज सहित करे।