बाराबंकी, 15 दिसम्बर (हि.स.)। महादेवा महोत्सव की चौथी शाम प्रसिद्ध बिहार की लोक गायिका मैथिली ठाकुर के नाम रही। उनके आते ही मंच तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा। उन्होंने हिंदी भोजपुरी अवधी में दर्जनों भजन लोकगीत एवं गाने गाये। उनके प्रत्येक गानों पर दर्शक तालियां बजाते रहे। कार्यक्रम का शुभारंभ उत्तर प्रदेश सरकार के राज्य मंत्री सतीश शर्मा ने पूर्व विधायक शरद अवस्थी, जिलाधिकारी ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्वलन कर किया। उसके बाद राज्य मंत्री ने मैथिली ठाकुर व उनके साथ आए हुए वाद्य यंत्रों के कलाकारों को मोमेंटो व अंग वस्त्र देकर सम्मानित किया। तत्पश्चात मैथिली में अपने चिर परिचित अंदाज में शंकर तेरी जटा में बहती है गंग धारा, राम जी से पूछे जनकपुर की नारी बता दे बाबुवा लोगवा देत काहे गारी बता दे बाबुवा, राम सीता विवाह, भगवान शंकर विवाह, हरि नाम नहीं तो जीना क्या समेत दर्जनों लोकगीत भजन व गाने गाये।
महादेवा महोत्सव में मैथिली ठाकुर ने मंच पर आते ही संमा बाद दिया। उन्होंने एक से बढ़कर एक गाने गा लोगो को खूब तालियां बजवाई।उन्होंने अपनी लोक गायकी से सभी को मंत्र मुग्ध कर दिया।
अपने भाई ऋषभ ठाकुर के साथ मैथिली ने दी प्रस्तुति
महादेवा महोत्सव के मंच पर बिहार की लोक गायिका मैथिली ठाकुर अपनी शानदार आवाज से दर्शकों का मन जीत लिया। पूरा पंडाल खचाखज भरा रहा। करीब 8:00 बजे अपने भाई ऋषभ ठाकुर और अपने साथी कलाकारों के साथ जैसे वह मंच पर आई तालियों की गड़गड़ाहट से पूरे मंच ने उनका शानदार स्वागत किया। फिर उन्होंने लोकगीत भजन व हिंदी फिल्मों के गानों की एक से एक बढ़कर प्रस्तुति दे समा बांध दिया।
जब उन्होंने गाया मिथिला से पूछे जनकपुर की नारी बता दें बाबुवा लोगवा का देत काहे गाली बता दे बाबुवा, तो लोग झूम उठे वही हम कथा सुनाते राम सकल गुण धाम की यह रामायण है पुण्य कथा श्री राम की, तो लोग तालिया बजाने लगे। इसके बाद उन्होंने आज मिथिला नगरिया निहाल सखिया चारो दुलहा में बड़का हमार सखिया, गाया तो बैठे दर्शको ने खूब तालियां बजाई। उन्होंने कई भजन भी गाये। इसके बाद तेरे रसके कमर मेरी पहली नजर सहित कई फिल्मी गाने भी गाये। जिस पर दर्शक दीर्घा में बैठे लोगों ने खूब तालियां बजाई। देर रात तक मैथिली का कार्यक्रम चला रहा और दर्शन बैठकर ठंड में भी उनका कार्यक्रम सुनते रहे।