उप चुनाव : बसपा बैकफुट पर तो भाजपा-अपना दल की साख दांव पर

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10HREG6 उप चुनाव : बसपा बैकफुट पर तो भाजपा-अपना दल की साख दांव पर

मीरजापुर, 09 मई (हि.स.)। छानबे विधानसभा सीट पर होने वाले उप चुनाव में बसपा मैदान से गायब है। उप चुनाव में जहां सभी दल के आठ उम्मीदवार मैदान में हैं, तो वहीं बसपा इससे दूर है। बसपाई रणनीतिकारों का कहना है कि बसपा का पूरा फोकस निकाय चुनाव पर है। विधानसभा उप चुनाव से बहुजन समाज पार्टी ने किनारा किया हुआ है। पार्टी ने चुनाव से अपने को अलग करते हुए उम्मीदवार नहीं उतारा है।

छानबे विधानसभा सीट पर उप चुनाव में कब्जा बचाने में अपना दल (सोनेलाल) के साथ उसकी सहयोगी भाजपा की साख भी दांव पर है। उप चुनाव के नतीजे आगामी लोकसभा चुनाव के मद्देनजर महत्वपूर्ण होंगे। चर्चा है कि छानबे सीट पर उम्मीदवार भले ही अपना दल के हैं, लेकिन चुनाव के नतीजे भाजपा सरकार व संगठन के दृष्टिकोण से ही देखे जाएंगे। अब 10 मई को मतदान होगा और 13 मई को निकाय चुनाव के साथ परिणाम भी घोषित किए जाएंगे।

मिली जीत तो लोकसभा चुनाव तक असर करेगी भाजपा की रणनीति

भाजपा ने अब तक हुए उप चुनाव को सरकार और संगठन की प्रतिष्ठा का प्रश्न बनाते हुए चुनाव जीतने में पूरी ताकत लगाई है। यही वजह है कि रामपुर लोकसभा, आजमगढ़ लोकसभा, रामपुर विधानसभा उप चुनाव में भाजपा को जीत मिली। हालांकि मुजफ्फरनगर की खतौली सीट पर भाजपा को शिकस्त का सामना भी करना पड़ा था। यदि अपना दल (सोनेलाल) ने चुनाव जीता तो भाजपा की रणनीति के साथ कोल समाज को साधने की योजना सफल होगी और यह रणनीति लोकसभा चुनाव तक असर करेगी।

एनडीए व सपा में मुख्य मुकाबला, कांग्रेस भी किंगमेकर बनने की आस में

प्रचार अभियान के अंतिम दिन तक भाजपा-अपना दल (सोनेलाल) और समाजवादी पार्टी ने जोरदार लड़ाई लड़ी है। कांग्रेस इन दोनों दलों के मुकाबले तो नहीं दिखी, लेकिन किंगमेकर बनने की आस में है। सभी दलों की ओर से बड़े नेता की चुनावी सभा हुई। प्रचार का अंत होते-होते भाजपा ने काफी समां बांध दिया। प्रचार अभियान के हिसाब से देखें तो भाजपा और सपा में ही मुख्य मुकाबला नजर आ रहा है और तीसरे स्थान पर कांग्रेस ने भी अपने हिसाब से काफी मेहनत करने की कोशिश की है।

आखिरी ओवर में हुई थी धुंआधार बैटिंग

भाजपा के स्टार प्रचारक मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने छानबे विधानसभा सीट पर मतदाताओं को साधने के लिए उसी तरह से धुआंधार बैटिंग की है, जैसे क्रिकेट में आखिरी ओवरों में किए जाते हैं। मुख्यमंत्री ने चुनावी फिजां को अपने पक्ष में बनाए रखने की भरपूर कोशिश की है। वहीं समाजवादी पार्टी के नरेश उत्तम ने भी भाजपा को घेरने की पूरी कोशिश की थी।

बहुत ही रोचक रहा विधानसभा छानबे का सियासी सफर

विधानसभा छानबे का सियासी सफर बहुत ही रोचक रहा है। वर्ष 1974 से कांग्रेस के पुरुषोत्तम चौधरी लगातार तीन बार विधायक रहे। वर्ष 1991 में जनता दल से दुलारे लाल ने जीत दर्ज की। मध्यावधि चुनाव 1993 में बहुजन समाज पार्टी के श्रीराम भारती जीते। इसके बाद वर्ष 1996 में भारतीय जनता पार्टी से भाईलाल कोल ने कमल का फूल खिलाते हुए जीत दर्ज की। वर्ष 2002 में बहुजन समाज पार्टी से पकौड़ी लाल कोल, वर्ष 2007 में बहुजन समाज पार्टी से सूर्यभान ने जीत दर्ज किया था। इसके बाद वर्ष 2012 में समाजवादी पार्टी के भाइलाल कोल ने जीत दर्ज करते हुए खाता खोला। इसके बाद भारतीय जनता पार्टी और अपना दल एस के गठबंधन प्रत्याशी राहुल प्रकाश कोल वर्ष 2017 तथा वर्ष 2022 में लगातार दो बार जीत दर्ज करके विधायक बने।

वर्ष 2022 में मिला था 105202 मत

विधानसभा 2022 के चुनाव में अपना दल (सोनेलाल) के उम्मीदवार राहुल प्रकाश कोल को 102502 मत मिला था। उन्होंने निकटतम प्रतिद्वंदी सपा की कीर्ति कोल को 38113 मतों से पराजित किया था। इसमें कुल 47.29 प्रतिशत मतदान हुआ था। वहीं सपा की कीर्ति कोल 64389 मत पाकर दूसरे स्थान तो बसपा के धनेश्वर गौतम 32145 मत पाकर तीसरे स्थान पर थे।

समझौते में अपना दल को मिली थी छानबे विधानसभा सीट

पिछले विधानसभा चुनाव में हुए समझौते के तहत छानबे विधानसभा सीट अपना दल (सोनेलाल) को दी गई थी, इसलिए उप चुनाव में भी अपना दल ने दावेदारी पेश की थी। छानबे विधायक राहुल प्रकाश कोल के निधन से यह सीट खाली हो गई थी। छानबे विधानसभा उप चुनाव के लिए 10 मई को मतदान होगा।