लखनपुरी में श्रद्धाभाव से मनाई गई आदि शंकराचार्य की जयंती - सरस जनवाद

लखनपुरी में श्रद्धाभाव से मनाई गई आदि शंकराचार्य की जयंती

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26HREG3 लखनपुरी में श्रद्धाभाव से मनाई गई आदि शंकराचार्य की जयंती

महानगर स्थित अवध प्रांत के संस्कृत भारती कार्यालय में हुआ जयंती कार्यक्रम

लखनऊ, 25 अप्रैल (हि.स.)। लखनपुरी में मंगलवार को आदि शंकराचार्य जयंती श्रद्धाभाव से मनाई गई। भक्तों ने उनके बताएं गए धर्मशास्त्र के उपदेशों को याद किया और विचार हुआ कि यदि आदि शंकरचार्य नहीं होते, तो क्या होता? इस अवसर पर महानगर स्थित अवधं प्रांत के संस्कृत भारती कार्यालय में जयंती कार्यक्रम हुआ और साथ ही चल रही ऑनलाइन अष्टाध्यायी व्याकरण कक्षा का समापन भी हुआ। इससे पहले संस्कृत भारती अवध प्रांत के अध्यक्ष व मुख्य वक्ता शोभन लाल उकील, संगठन मंत्री गौरव नायक व अन्य अतिथियों ने आदि शंकराचार्य के चित्र पर मालयार्पण किया और दीप प्रज्जवलित कर कार्यक्रम का शुभारम्भ किया।

संस्कृत भारती अवध प्रांत के अध्यक्ष शोभन लाल उकील ने आदि शंकराचार्य के जीवन पर प्रकाश डालते हुए बताया कि उन्होंने 16 साल की उम्र में वेद, उपनिषद आदि ग्रंथों पर भाष्य लिख दिया था। एक बाद वेद व्यास जी उनकी परीक्षा लेने आए तो उनकी उम्र में 16 साल की वृद्धि कर दी। 32 साल की उम्र में वह परमात्मा में विलीन हो गए थे।

आदि शंकराचार्य भारत के एक महान दार्शनिक एवं धर्मप्रवर्तक थे। उन्होने अद्वैत वेदान्त को ठोस आधार प्रदान किया। भगवद्गीता, उपनिषदों और वेदांतसूत्रों पर लिखी हुई इनकी टीकाएं बहुत प्रसिद्ध हैं। परम्परा के अनुसार उनका जन्म 788 ईस्वी और महासमाधि 820 ईस्वी में हुई थी। आदि शंकराचार्य ने देश में चार कोनों में चार मठों की स्थापना की थी जो वर्तमान में भी बहुत प्रसिद्ध और पवित्र माने जाते है, जिन पर आसीन पूज्य संन्यासी’ शंकराचार्य’ कहे जाते हैं। ये चारों स्थान ज्योतिष्पीठ बदरिकाश्रम, श्रृंगेरी पीठ, द्वारिका शारदा पीठ और पुरी गोवर्धन पीठ है। उन्होंने अनेक विधर्मियों को भी अपने धर्म में दीक्षित किया था। आदि शंकराचार्य भगवान शिव के शंकर के अवतार मानेे गए हैं। इन्होंने ब्रह्मसूत्रों की बड़ी ही विशद और रोचक व्याख्या की है।,आदि शंकराचार्य को शिव का अवतार माना जाता है। उन्होंने ईश, केन, कठ, प्रश्न, मुण्डक, मांडूक्य, ऐतरेय, तैत्तिरीय, बृहदारण्यक और छान्दोग्योपनिषद् पर भाष्य लिखा। वेदों में लिखे ज्ञान को एकमात्र ईश्वर को संबोधित समझा और उसका प्रचार पूरे देश में किया।

अध्यक्ष उकील ने बताया कि दो महीने बाद पुनः व्याकरण कक्षा शुरू की जाएगी , लेकिन इसमंें पहले व्याकरण का दूसरे स्तर पर पढाया जाएगा।

संस्कृति भारती के अवध प्रांत के संगठन मंत्री गौरव नायक ने बताया कि अयोध्या में जून के पहले सप्ताह से संस्कृत पठन-पाठन और सम्भाषण का वर्ग निःशुल्क आयोजित किया जाएगा। इसमेें 16 साल की उम्र से अधिक को कोई व्यक्ति भाग ले सकता है। इस अवसर पर संस्थान के व अन्य व्यक्ति भी उपस्थित थे।