रतलाम:ग्रामीण आजीविका मिशन की मदद से महिलाओं ने स्वयं को सशक्त बनाया

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03HREG469 रतलाम:ग्रामीण आजीविका मिशन की मदद से महिलाओं ने स्वयं को सशक्त बनाया

रतलाम, 3 मार्च (हि.स.)। राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के तहत समूहों में एकत्रित होकर महिलाएं आर्थिक गतिविधियां बड़े पैमाने पर जिले में करने लगी हैं जिससे वह अपने परिवार की आर्थिक धुरी और मजबूत सहारा बन गई हैं। महिलाएं मिशन की मदद से छोटे-छोटे ऋण लेती हैं। आर्थिक गतिविधियां करती हैं। ऐसा ही एक समूह रतलाम ग्रामीण क्षेत्र के ग्राम तीतरी का है। इस राधे-राधे आजीविका समूह की सदस्यों में ज्योति गुर्जर, भावना, पोला बाई, मंजू गुर्जर, आशाबाई, अनीता तथा भूली बाई गुर्जर आदि शामिल हैं।

उक्त महिलाओं द्वारा विगत नवंबर 2018 में अपने समूह का गठन किया गया। समूह में शामिल होने से पहले महिलाएं अपने पशुओं के दुग्ध का विक्रय कॉपरेटिव संस्था को कर रही थीं। उन्हें दूध के फेट परसेंटेज के आधार पर भुगतान होता था जिसका पैसा कम मिलता था। समूह बनाने के बाद सभी महिलाएं अपने समूह से पशुधन और चारा खरीदने के लिए छोटे-छोटे ऋण लेने लगी। इससे पहले वे अन्य संस्थाओं से ऋण लेती थीं जिनकी ब्याज दर सालाना 24 से 36 परसेंट होती थी जबकि अब समूह के कार्पस से ऋण 1 प्रतिशत मासिक ब्याज पर लेती हैं। इस कारण महिलाएं ब्याज भारी बोझ से सुरक्षित हुई हैं। उनको अब कम ब्याज पर ऋण मिलता है जिससे आर्थिक बेहतरी प्राप्त हुई है। इससे पशुओं की वे अच्छे से देखभाल कर पाती हैं।

बेहतर देखभाल से पशुओं के दुग्ध उत्पादन में वृद्धि हो रही है। पहले महिलाएं कोऑपरेटिव संस्था को दूध विक्रय करती थी, अब वे सीधे ग्राहकों को दुग्ध विक्रय करती हैं, उन्हें ज्यादा लाभ मिलता है। आजीविका मिशन ने महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बना दिया है। अपनी आर्थिक संपन्नता का श्रेय महिलाएं मुख्यमंत्री शिवराजसिंह चौहान की महिला सशक्तीकरण नीति को देती हैं।