लुधियाना में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने अपने भीतर से एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए कई नेताओं को पार्टी से निष्कासित कर दिया है। भाजपा के जिलाध्यक्ष रजनीश धीमान ने यह कदम उठाते हुए एक दर्जन से अधिक नेताओं को पार्टी के खिलाफ गतिविधियों में शामिल होने के आरोप में छह साल के लिए निष्कासित कर दिया। यह निर्णय पार्टी के भीतर अपनी नीतियों और अनुशासन को बनाए रखने के लिए लिया गया है। यह निष्कासन उन पूर्व पार्षदों और नेताओं के लिए है, जिन्होंने पार्टी की इमीज को धूमिल करने वाली गतिविधियों में भाग लिया।
रजनीश धीमान ने जानकारी दी कि जिन नेताओं को निष्कासित किया गया है, उनमें सरबजीत सिंह काका, परमिंदर सिंह लापरा, सुरजीत सिंह राय, बलविंदर सिंह बिंदर, मन्नू अरोड़ा, अमरजीत सिंह काली, सरवन अत्री, अजय गोस्वामी, शिव देवी गोस्वामी, सीमा शर्मा, श्याम शास्त्री, हरजिंदर सिंह, कुलदीप शर्मा, संदीप मनी, नरेश स्याल, अनीता शर्मा जैसे नेता शामिल हैं। इनकी गतिविधियों के पीछे के कारणों की चर्चा करते हुए धीमान ने बताया कि कुछ नेता पार्टी के भीतर रहते हुए भी उसके विरोध में काम कर रहे थे, जिससे पार्टी की छवि पर विपरीत प्रभाव पड़ा।
भाजपा के पंजाब प्रभारी और गुजरात के पूर्व मुख्यमंत्री विजय रूपाणी तथा अन्य वरिष्ठ नेताओं ने लुधियाना भाजपा की कोर कमेटी के साथ मिलकर इस निष्कासन का निर्णय लिया। यह निर्णय इस बात पर आधारित था कि पार्टी का अनुशासन और उसकी विचारधारा को मजबूत बनाए रखना आवश्यक है। नेताओं के इस समूह को तत्काल प्रभाव से निष्कासित किया गया है, जिससे यह संकेत मिलता है कि पार्टी अपने भीतर की गड़बड़ियों को गंभीरता से लेकर कार्यवाही करने के लिए तैयार है।
सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, निष्कासित किए गए कुछ कार्यकर्ता नगर निगम चुनावों में टिकट न मिलने के कारण नाराज थे, जिसके परिणामस्वरूप वे पार्टी के खिलाफ गतिविधियों में शामिल हो गए। यह घटनाक्रम भाजपा की रणनीति को उजागर करता है कि वह अपने नेता और कार्यकर्ताओं को पार्टी के प्रति वफादार रहने के लिए प्रेरित करने में कोई कमी नहीं छोड़ना चाहती है। भाजपा इस प्रयास के माध्यम से यह सुनिश्चित करना चाहती है कि दल में अनुशासन और एकता का माहौल बना रहे।
इस निष्कासन के पीछे के उद्देश्य का मुख्य आधार स्पष्ट है – पार्टी में ऐसे तत्वों को खारिज करना जो उसकी नीतियों और सिद्धांतों का पालन नहीं कर रहे हैं। इस प्रकार का कदम सत्ताधारी दल के लिए जरूरी है, ताकि वह अपने कार्यकर्ताओं को एक दिशा में आने और संगठन की मजबूती की दिशा में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित कर सके। भाजपा का यह प्रयास आगामी चुनावों के दृष्टिगत भी महत्वपूर्ण साबित हो सकता है, क्योंकि वह एक मजबूत और अनुशासित पार्टी के रूप में सामने आना चाहती है।