चंडीगढ़ जिले के उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग ने गोरोफी एजुकेशन सर्विसेज को सेवा में लापरवाही और अनुचित व्यापार व्यवहार का दोषी ठहराते हुए शिकायतकर्ता को मुआवजा देने का आदेश दिया है। आयोग ने इस एजेंसी पर 15,000 रुपए का हर्जाना लगाने के साथ ही एडवांस में लिए गए 40,000 रुपए को 9% वार्षिक ब्याज सहित लौटाने और साथ में 7,000 रुपए मुकदमे का खर्च अदा करने का निर्देश दिया है। यह मामला जीरकपुर निवासी प्रमोद कुमार सिंह द्वारा आयोग में दायर की गई शिकायत के आधार पर चलाया गया था।
प्रमोद कुमार सिंह की शिकायत के अनुसार, अगस्त 2022 में गोरोफी एजुकेशन सर्विसेज के एक एजेंट ने उन्हें विदेश भेजने का वादा किया और प्रति घंटे डॉलर में अच्छी आय का भरोसा दिलाया। इस प्रक्रिया की लागत के लिए एजेंसी ने 4.40 लाख रुपए का पैकेज पेश किया, जिसमें से 40,000 रुपए एडवांस देने की बात की गई। प्रमोद ने इस पैकेज के लिए 30,000 रुपए नकद और 10,000 रुपए ऑनलाइन ट्रांसफर कर दिए, लेकिन एजेंसी ने केवल 20,000 रुपए का एक रसीद प्रदान किया।
एजेंसी ने प्रमोद को 45 दिनों के भीतर विदेश भेजने का आश्वासन दिया था, लेकिन जब निर्धारित समय समाप्त हो गया, तब भी कोई आवश्यक प्रक्रिया शुरू नहीं की गई। जब प्रमोद ने एजेंसी से संपर्क किया, तो उन्हें बताया गया कि विदेश नीति में बदलाव के कारण उन्हें 2 लाख रुपए अतिरिक्त देने होंगे। प्रमोद ने इस मांग को अस्वीकार किया और अपनी जमा राशि की वापसी की मांग की। हालांकि, एजेंसी ने न केवल पैसे लौटाने से इनकार किया, बल्कि शिकायतकर्ता का अपमान भी किया।
आयोग का यह निर्णय इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि एजेंसी की ओर से कोई जवाब दाखिल नहीं किया गया, जिससे मामले को एक्स पार्टी घोषित कर प्रमोद के पक्ष में फैसला सुनाया गया। आयोग ने स्पष्ट किया कि गोरोफी एजुकेशन सर्विसेज ने न केवल अपनी सेवाओं में कमी की है, बल्कि उपभोक्ता के हितों को भी गंभीरता से दरकिनार किया है। यह फैसला उपभोक्ताओं के अधिकारों का संरक्षण करने में एक कदम है और यह दर्शाता है कि यदि उपभोक्ताओं के साथ अन्याय होता है, तो वे कानूनी उपाय कर सकते हैं।
इस निर्णय से यह स्पष्ट होता है कि उपभोक्ता कानून के तहत उपभोक्ताओं को अपनी शिकायतें दर्ज करने का हक है और उनके हितों की रक्षा के लिए न्यायपालिका हमेशा तैयार है। यह मामला अन्य उपभोक्ताओं के लिए भी एक उदाहरण बनता है कि उन्हें अपने अधिकारों के लिए आवाज उठानी चाहिए और किसी भी प्रकार के धोखाधड़ी या अनुचित व्यापार में लिप्त एजेंसियों के खिलाफ कदम उठाना चाहिए।