किसान नेता डल्लेवाल का अल्टीमेटम: मांगें न मानीं तो 26 नवंबर से आमरण अनशन!

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चंडीगढ़ के किसान भवन में आयोजित एक महत्वपूर्ण प्रेस कॉन्फ्रेंस में किसान मजदूर मोर्चा और संयुक्त किसान मोर्चा (गैर-राजनीतिक) के नेताओं ने आगामी गंभीर कदमों की घोषणा की है। इन संगठनों के नेताओं ने मीडिया को बताया कि यदि उनकी मांगों की अनदेखी जारी रही, तो किसान नेता जगजीत सिंह डल्लेवाल 26 नवंबर से खनौरी बॉर्डर पर अनशन पर बैठेंगे। इस दौरान उन्होंने केंद्र और राज्य सरकार दोनों पर गंभीर आरोप लगाए हैं, यह चेतावनी देते हुए कि उनकी बातों को नजरअंदाज करना सरकार के लिए महंगा पड़ सकता है।

जगजीत सिंह डल्लेवाल का कहना था कि उनकी कई महत्वाकांक्षी मांगें, जैसे कि न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) की गारंटी, खाद की उपलब्धता और फसल खरीद में पारदर्शिता, अब तक पूरी नहीं हो पाई हैं। इस पर उन्होंने केंद्र और राज्य सरकार को कटघरे में खड़ा करते हुए कहा कि किसान समस्याओं को अनदेखा करने का क्रम जारी है। उन्होंने स्पष्ट किया कि अगर इन मांगों को गंभीरता से नहीं लिया गया, तो किसानों के आंदोलन की तीव्रता बढ़ सकती है।

प्रेस कॉन्फ्रेंस में मोर्चे के नेताओं ने केंद्र सरकार को चेतावनी दी है कि यदि डल्लेवाल के अनशन के दौरान कुछ भी गलत हुआ, तो उसकी जिम्मेदारी पूरी तरह से केंद्र और राज्य सरकार की होगी। इसके अतिरिक्त, अन्य किसान नेता इस आंदोलन को जारी रखने के लिए मोर्चा के कार्यो में भागीदार हो सकते हैं। यह चेतावनी किसानों की तीव्र नाराजगी को दर्शाती है, जो लंबे समय से अपनी मांगों को पूरा करने का इंतजार कर रहे हैं।

आने वाले कार्यक्रमों के अंतर्गत, 17 नवंबर को खनौरी बॉर्डर पर श्री गुरु नानक देव जी के प्रकाश पर्व के अवसर पर श्री अखंड पाठ सहिब का भोग डाला जाएगा और कीर्तन दरबार का आयोजन किया जाएगा। इसके बाद, 18 नवंबर को एक और प्रेस कॉन्फ्रेंस का आयोजन होगा, जिसमें आंदोलन की आगामी रणनीति के बारे में जानकारी दी जाएगी। किसान नेताओं ने बताया कि यह निर्णय उनकी मजबूरी का परिणाम है, क्योंकि उनकी आवाज़ को लगातार अनसुना किया जा रहा है।

किसान नेताओं जगजीत सिंह डल्लेवाल और सरवन सिंह पंधेर ने यह भी कहा कि न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) को लेकर किए गए सरकारी दावे धराशाई हो चुके हैं। मंडियों में धान की खरीद के दौरान किसानों को कीमतों और वजन में कटौती का सामना करना पड़ रहा है। इसके साथ ही, खाद की कीमतों में भी भारी वृद्धि हो गई है। एक किलो खाद की बोरी, जो पहले 1,350 रुपए में मिलती थी, अब 1,750 रुपए में बिक रही है। इस बढ़ती महंगाई ने किसानों की आर्थिक स्थति को और भी कमजोर कर दिया है, जिससे उनकी चिंता और बढ़ गई है।

इन सभी मुद्दों को ध्यान में रखते हुए, किसान संगठनों ने एकजुटता के साथ अपनी स्थिति को स्पष्ट किया है और सरकार से उचित कार्रवाई की मांग की है। उनका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि किसानों का हित हमेशा सर्वोपरि रहे।