मुक्तसर में रोडवेज कर्मचारियों का हंगामा: चुनाव में करेंगे विरोध, पक्की नौकरी और समान वेतन की मांग!

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मुक्तसर में पंजाब रोडवेज पनबस पीआरटीसी कॉन्ट्रैक्ट वर्कर्स यूनियन ने सरकार के खिलाफ जोरदार प्रदर्शन किया। यह प्रदर्शन मुक्तसर डिपो के गेट पर हुआ, जहां यूनियन के नेताओं ने अपनी मांगों को लेकर आक्रोश जताया। डिपो प्रधान जगसीर सिंह मानक ने बताया कि पहले की सरकारों ने 3, 5 और 7 साल से कार्यरत कर्मचारियों को स्थायी किया था, परंतु हाल की आम आदमी पार्टी की सरकार इस दिशा में कोई ठोस कदम उठाने में असफल रही है। उन्होंने कहा कि कच्चे कर्मचारियों को स्थायी करने, सुप्रीम कोर्ट के समान काम समान वेतन के निर्णय को लागू करने, और सेवा नियमों को लागू करने के लिए सरकार की ओर से कोई प्रगति नहीं हो रही है।

उपरोक्त समस्याओं के अलावा, प्रदर्शनकारियों ने सरकारी मशीनरी के दुरुपयोग और विज्ञापनबाजी से हुए करोड़ों रुपए के नुकसान पर भी चिंता व्यक्त की। इस नुकसान के कारण कर्मचारियों को समय पर वेतन नहीं मिल पा रहा है, जिसके चलते यूनियन को लगातार संघर्ष करना पड़ रहा है। जगसीर ने बताया कि अगर उनकी मांगों पर ध्यान नहीं दिया गया, तो वे विभाग के उच्च अधिकारियों के खिलाफ रोष प्रदर्शन करेंगे और आगामी 17 तारीख को उपचुनाव के दौरान सरकार की कर्मचारी विरोधी नीतियों को उजागर करने का भी निर्णय लिया है।

युवाओं के मीत प्रधान भुपिंदर संधू ने बताया कि परिवहन विभाग के अधिकारी सरकार के निर्देशों की अनदेखी कर रहे हैं और यूनियन के साथ हुई वार्ताओं में हुए निर्णयों को लागू करने से मना कर रहे हैं। संधू ने स्पष्ट किया कि जब तक उनकी मांगें पूरी नहीं होतीं, वे संघर्ष को जारी रखने का संकल्प लिए हुए हैं। इस दौरान यूनियन के अन्य पदाधिकारी, जैसे कि मीत प्रधान इकबाल सिंह, बलवंत सिंह, बयंत सिंह, अमनदीप सिंह, कुलविंदर सिंह और बलजीत सिंह भी मौजूद थे और सभी ने एकजुटता से अपनी आवाज उठाई।

इस प्रदर्शन ने यह स्पष्ट कर दिया है कि पंजाब रोडवेज के कर्मचारियों की समस्याओं को हल करने के लिए अब तत्काल कदम उठाने की आवश्यकता है। यदि सरकार इन मुद्दों पर ध्यान नहीं देती है, तो कर्मचारियों की ओर से और अधिक तीखे कदम उठाए जा सकते हैं। यूनियन ने यह भी चेतावनी दी है कि यदि उनकी न्यायसंगत मांगों की अनदेखी की गई, तो भविष्य में हड़ताल जैसे कठोर उपायों की संभावनाएं भी बरकरार रहेंगी। कर्मचारी इस बात पर अड़े हुए हैं कि उन्हें अपने अधिकारों के लिए लड़ना होगा और अपने सहकर्मियों के हितों की रक्षा करने के लिए दृढ़ रहेंगे।