जगराओं में किसानों का हंगामा: खाद की कमी और पराली मामले पर ADC दफ्तर घेराव!

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जगराओं के किसानों ने आज एडीसी कार्यालय का घेराव कर धरना प्रदर्शन किया। यह प्रदर्शन किसानों द्वारा धान की लिफ्टिंग में हो रही समस्याओं, शैलर मालिकों की गुंडागर्दी, डीएपी खाद की कमी और धान की पराली जलाने के मामलों को लेकर किया गया। इस दौरान किसानों ने केंद्र और राज्य सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। भारतीय किसान यूनियन एकता डकौदा के जिला अध्यक्ष जगतार सिंह देहडका और जिला सचिव इंदरजीत सिंह धालीवाल ने बताया कि मोदी सरकार की योजनाओं तथा भगवंत मान सरकार की अक्षमता के कारण पंजाब के किसान पिछले डेढ़ महीने से मंडियों में परेशान हैं।

किसानों का कहना है कि राज्यभर में किसानों के भारी विरोध के बावजूद मंडियों में धान खरीद की उचित व्यवस्था नहीं की गई है। इस सीज़न में धान उठाव की स्थिति पहले से भी बदतर हो गई है। शैलर मालिक किसानों से नमी का हवाला देकर उनकी धान की कटाई के नाम पर जबरदस्ती वसूली कर रहे हैं। वे किसानों द्वारा बेचे गए धान को गीला बताकर लौटा रहे हैं या कटौती कर रहें हैं, जो किसानों के लिए बेहद नुकसानदायक हो रहा है।

किसानों ने आरोप लगाया कि कुछ आढ़तियों और अधिकारियों की मिलीभगत से बाहरी मंडियों में न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) से कम दाम पर खरीदी गई धान को ट्रॉलियों के जरिए स्थानीय बाजारों में बेचा जा रहा है। इससे मंडी शुल्क की चोरी हो रही है, जो सरकार के खजाने को भारी नुकसान पहुंचा रहा है। किसानों ने सरकार से मांग की कि ऐसे शैलर मालिकों का लाइसेंस रद्द किया जाए और उन्होंने यह भी कहा कि जो लूट किसानों के साथ हुई है, उसे तुरंत लौटाया जाए।

किसान नेताओं ने यह भी उल्लेख किया कि डीएपी की कमी के कारण आलू और गेहूं की बुआई में देरी हो रही है, जिससे उनकी फसल पर संकट आ गया है। उन्होंने सरकार से डीएपी की आपूर्ति सुनिश्चित करने की आवश्यकता जताई। साथ ही, इस विरोध प्रदर्शन के माध्यम से उन्होंने पंजाब में सरकार द्वारा जारी पराली जलाने के पर्चों को रद्द करने की भी मांग की।

किसानों का दृढ़ मानना है कि उनकी समस्याओं को सरकारी स्तर पर गंभीरता से नहीं लिया जा रहा है। अगर किसानों की समस्याओं का समाधान नहीं किया गया, तो वे और अधिक ठोस कदम उठाने के लिए मजबूर होंगे। इस धरने में बड़ी संख्या में किसान शामिल हुए और उनकी एकजुटता ने स्पष्ट रूप से दर्शाया कि वे अपनी मांगों के प्रति कितने गंभीर हैं। इस प्रकार, यह आंदोलन किसानों के अधिकारों और उनकी मांगों के लिए निरंतर संघर्ष की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।