महर्षि पतंजलि के योग सूत्रों पर आधारित पुस्तक अपूर्व आलोक का लोकार्पण

Share

08HREG369 महर्षि पतंजलि के योग सूत्रों पर आधारित पुस्तक “अपूर्व आलोक” का लोकार्पण

वाराणसी,08 सितम्बर (हि.स.)। महर्षि पतंजलि के योग सूत्रों की व्याख्या के संकलन पर आधारित पुस्तक ‘अपूर्व आलोक’ का लोकार्पण जंगमबाड़ी मठ के जगद्गुरु डॉ. चंद्रशेखर शिवाचार्य महास्वामी ने किया। छावनी क्षेत्र स्थित एक होटल में आयोजित लोकार्पण कार्यक्रम में डॉ. चंद्रशेखर शिवाचार्य ने पुस्तक की सराहना की ।

लोकार्पण कार्यक्रम में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के केन्द्रीय कार्यकारिणी सदस्य सुरेश सोनी भी शामिल हुए। समारोह में सारनाथ खजूही स्थित कापिल सांख्य योग आश्रम के साधक सतीश चंद्र द्विवेदी ने अतिथियों का स्वागत कर कहा कि हमारे दादा गुरु सांख्य योग आदर्श स्वामी हरिहरानंद आरण्य एवं स्वामी धर्ममेघ आरण्य ने साख्ययोग से सम्बंधित ज्ञान को मूल संस्कृत से बांग्ला भाषा में प्रतिपादित किया था। ये ज्ञान हिन्दी भाषी क्षेत्र के लिए सुगम्य नही था ।

दादा गुरू ने रचित,संकलित, अनूदित,विभिन्न पत्राचारों एवं रुपकों सम्बन्धी पुस्तकों में उपलब्ध सांख्य योग साहित्य की विभिन्न पुस्तकों / दार्शनिक निबंधों में जो बांग्ला / संस्कृत भाषा में थे, का हिन्दी रुपांतरण किया ।

उन्होंने बताया कि अपूर्व आलोक नाम से आठ खंडों में प्रकाशित होने वाला सांख्य योग संबंधित पुस्तक अपने आप में अलग है। पुस्तक के प्रथम खण्ड में महर्षि पातंजल के योग सूत्रों की व्याख्या की गई है। महर्षि पतंजलि ने योग सूत्रों की व्याख्या सूत्र रूप में की थी। सूत्रों के गूढ़ अर्थ को आमजन को समझाने के लिए ऋषियों ने भाष्य लिखें। इसी भाष्य पर स्वामी हरिहरानंद आरण्य ने टीका अपनी पुस्तक पातंजल योग दर्शन में की है। इसके अतिरिक्त “योग कारिका” और “भास्वती” नामक पुस्तकों में योग सूत्रों पर विस्तृत व्याख्या की।

स्वामी हरिहरानंद के शिष्य स्वामी धर्ममेघ आरण्य ने योग सूत्रों की सरल व्याख्या “पातंजल योग सोपान नामक पुस्तक में की । लोकार्पित होने वाली पुस्तक में उक्त चारों पुस्तकों में दिए गए सूत्रों के अर्थों को एक सूत्रवार संकलित किया गया है । इस दौरान बताया गया कि ‘अपूर्व आलोक’ पुस्तक स्वामी हरिहरानन्द आरण्य, इनके शिष्य स्वामी धर्ममेघ आरण्य व इनके शिष्य स्वामी ओम प्रकाश आरण्य के लिखे योग शास्त्र का संकलन है। इसके शेष सात खंड प्रकाशनाधीन हैं।

कार्यक्रम में काशी विद्वत परिषद के अध्यक्ष पद्मभूषण प्रो.वशिष्ठ त्रिपाठी, राष्ट्रपति पुरस्कार प्राप्त प्रो. हृदय रंजन शर्मा, श्री काशी विश्वनाथ मंदिर न्यास के अध्यक्ष प्रो. नागेंद्र पांडेय, आश्रम के अभय सिंह, काशी जोन के डीसीपी आरएस गौतम, प्रो. सदाशिव कुमार द्विवेदी, प्रो. गोपबंधु मिश्र की खास उपस्थिति रही।