18HLEG8 अधिक वेतन की सेवानिवृत्ति बाद वसूली आदेश रद्द
–आठ फीसदी व्याज सहित बकाये का भुगतान करने का निर्देश
प्रयागराज, 18 अप्रैल (हि.स.)। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने पीएसी कांस्टेबल के सेवानिवृत्त होने के बाद अधिक वेतन भुगतान की वसूली आदेश 13 सितम्बर 10 को रद्द कर दिया है और 8 फीसदी ब्याज सहित बकाये सेवानिवृति परिलाभों व पेंशन का दो माह में भुगतान करने का निर्देश दिया है। कोर्ट ने कहा कि सेवानिवृत्ति के बाद अधिक भुगतान की वसूली नहीं की जा सकती।
यह आदेश न्यायमूर्ति सौरभ श्रीवास्तव ने लक्ष्मी नारायण सिंह की याचिका को मंजूर करते हुए दिया है। याची का कहना था कि उसकी नियुक्ति कांस्टेबल पद पर हुई और उसे हेड कांस्टेबल पीएसी पद पर प्रोन्नति मिली। 1973 में पीएसी विद्रोह के आरोप में उसे बर्खास्त कर दिया गया। किंतु आपराधिक केस में 1981 में उसे बरी कर दिया गया। आदेश की पुष्टि सुप्रीम कोर्ट तक हो गई। इसके बाद सेवा बहाली नहीं करने पर हाईकोर्ट के निर्देश के बाद 18 अक्टूबर 98 को बहाल किया गया। बकाया वेतन की मांग कोर्ट ने नहीं मानी। 31 अगस्त 2009 में सेवानिवृत्त हो गया। इसके बाद कहा गया कि याची को ग़लत वेतनमान तय कर दिया गया था। पुनर्निर्धारण कर रुपये 8,34,320 अधिक भुगतान की वसूली का आदेश दिया। जिसे यह कहते हुए चुनौती दी गई कि सुप्रीम कोर्ट के रफीक मसीह केस के फैसले के अनुसार विभाग अपनी गलती पर कर्मचारी की सेवानिवृत्ति के बाद उसे दोषी नहीं मान सकता। कोर्ट ने याचिका मंजूर कर ली है।