प्राकृतिक संतुलन से ही निरोग, स्वस्थ व प्रसन्नचित्त मानव जीवन की कल्पना

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02HREG138 प्राकृतिक संतुलन से ही निरोग, स्वस्थ व प्रसन्नचित्त मानव जीवन की कल्पना

औरैया, 02 अप्रैल (हि.स.)। एक विचित्र पहल सेवा समिति ने रविवार को ऑक्सफोर्ड शिक्षा प्रसार समिति के अधीनस्थ अटल आश्रय गृह में पर्यावरण असंतुलन विषय पर गोष्ठी का आयोजन किया।

गोष्ठी को संबोधित करते हुए समिति के संस्थापक आनन्द नाथ गुप्ता एडवोकेट ने बताया कि वर्तमान समय में पर्यावरण असंतुलन के कारण आम जनमानस में काफी बेचैनी हैं। उन्होंने बताया कि इसका कारण कोई और नहीं बल्कि पृथ्वी पर विचरण करने वाले हम सभी लोग हैं। पर्यावरण संरक्षण व उसके संतुलन की दिशा में हमारा कोई ध्यान नहीं हैं। प्राकृतिक आपदाओं की परवाह न करते हुए हम अपनी जरूरतों के साथ जिंदगी का भरपूर आनन्द ले रहे हैं।

गोष्ठी की अध्यक्षता कर रहे ज्ञान सक्सेना ने कहा कि प्रकृति के साथ जरूरत से ज्यादा छेड़छाड़ करने से पर्यावरण को अनवरत हो रहे नुकसान को देखने के लिए अब कहीं दूर जाने की आवश्यकता नहीं हैं। समूचे विश्व में प्रतिदिन बढ़ते हुए बंजर इलाके, रेगिस्तान व पेड़-पौधे विहीन जंगल इस बात का प्रमाण है कि हम लोग अपनी पृथ्वी और पर्यावरण की देखभाल जिम्मेदारी से नहीं कर पा रहे हैं। फलस्वरुप पर्यावरण असंतुलन का खतरा निरंतर बढ़ता जा रहा हैं।

बताया कि हिमालय के बहुतायत ग्लेशियर तेजी से पिघल रहे हैं। जो आगे आने वाले समय में बड़ी तबाही की वजह बन सकते हैं। धन कमाने की होड़ के चलते भौतिक व व्यापारिक दृष्टिकोण को दृष्टिगत रखते हुए प्राकृतिक धरोहरों का स्वरूप बदल कर रिहायशी व व्यवसायिक भवनों, होटलों का निर्माण तीव्र गति से कराया जा रहा है। पर्यावरण असंतुलन के चलते आए दिन प्राकृतिक त्रासदी, भूकंप, बेमौसम बरसात, ओलावृष्टि आदि मानव जीवन के भविष्य के लिए शुभ संकेत नहीं हैं। गोष्ठी में अधिक से अधिक पेड़ पौधों के साथ प्रकृति का श्रंगार व प्रकृति की देखभाल के प्रति लोगों से सजग रहने की अपील की गई।