-श्रावण मास में दूर-दूर से आते हैं भक्त
मुरैना 08 अगस्त (हि.स.)। मुरैना जिले में ऐसे कई धार्मिक स्थल हैं जिनका अपना एक अनूठा महत्व है। इनमें से कुछ तो ऐसे रहस्यमयी मंदिर हैं जिनका रहस्य आज तक अनसुलझा है। यहां त्रेता युगीन शनि मंदिर है तो द्वापर कालीन नगरी कुंतलपुर। तत्कालीन समय में विश्व के प्रमुख ज्योतिष केन्द्रों में शामिल रहा चौंसठ योगिनी मंदिर भी है तो एक रात में बना ककनमठ शिव मंदिर। इसके अलावा पहाडगढ़ के जंगलों में स्थित शिव जी का एक ऐसा अनोखा मंदिर भी है जिसकी सावन के महीने में कोई अदृश्य शक्ति पूजा-अर्चना करती है। यहां स्थित शिवलिंग पर प्राकृतिक झरने के माध्यम से चौबीसों घंटे पानी गिरता रहता है। शिवलिंग पर तड़के ही कोई शक्ति बैलपत्र व पुष्प चढ़ा जाती है। इस रहस्य को जानने का कई लोगों ने प्रयास किया लेकिन सभी असफल रहे, चूंकि इस समय सावन का महीना चल रहा है। इस वजह से यहां दूर-दूर से भक्त प्रतिदिन पहुंचकर शिव आराधना कर रहे हैं।
देश-दुनियां में ऐसे कई रहस्यमयी मंदिर हैं जिनके रहस्य के बारे में लाख प्रयास करने के बाद भी उनके रहस्य से पर्दा नहीं उठ पाया है। ऐसे ही रहस्यमयी मंदिरों में से एक मुरैना जिले के पहाडगढ़ क्षेत्र के जंगल की कंदरा में स्थित प्राचीन ईश्वरा महादेव मंदिर है। इस मंदिर का अपना विशेष महत्व है। ऐसा कहा जाता है कि यहां स्थित शिवलिंग की पूजा व अभिषेक कोई अदृश्य शक्ति ब्रह्म मुहूर्त में करती है। पुजारी द्वारा सुबह के समय जब मंदिर के पट खोले जाते हैं तो शिवलिंग पर बेलपत्र, फूल, चावल आदि चढ़े हुए मिलते हैं। प्राकृतिक सौन्दर्य के बीच बसे ईश्वरा महादेव का रहस्य वर्षों बाद भी नहीं सुलझ सका है।
बताया गया है कि इस रहस्य को जानने के लिए कई बार प्रयास किए गए लेकिन सभी प्रयास विफल रहे। गुफानुमा पहाड़ के नीचे प्राकृतिक झरने से शिवलिंग के शीर्ष पर सदैव जल गिरता रहता है। पहाडगढ़ निवासी डॉ. अरुण शर्मा बताते हैं कि सिद्ध बाबा ने इन पहाड़ों के बीच शिवलिंग स्थापित कर तपस्या की थी तभी से शिवलिंग के शीर्ष पर प्राकृतिक झरना अविरल जलाभिषेक कर रहा है। यहां पुजारी ब्रह्म मुहूर्त में मंदिर के पट खोलते हैं लेकिन तब तक कोई शिवलिंग का अभिषेक कर चुका होता है। श्री शर्मा के अनुसार इस मंदिर के गर्भ गृह में रहस्यमयी पूजा को जानने के लिए किसी ने शिवलिंग के ऊपर हाथ रख लिया था लेकिन तभी अचानक तेज आंधी चली और फिर कुछ देर के लिए हाथ हटाया और अदृश्य शक्ति शिव का पूजन कर गई लेकिन जिस व्यक्ति ने शिवलिंग पर हाथ रखा था वह कोढ़ी हो गया। कई बार संत महात्माओं द्वारा भी इस रहस्य को जानने के प्रयास किए गए, लेकिन वह सफल नहीं हो सके। बताया गया है कि पूजा का समय होते ही साधुओं की झपकी लग जाती थी और पल भर में कोई शक्ति शिवलिंग का अभिषेक कर जाती थी। स्थानीय ग्रामीणों का कहना है की इस शिवलिंग की स्थापना रावण के भाई विभीषण द्वारा की गई थी। विभीषण को सप्त चिरंजीवियों में से एक माना गया है इसलिए विभीषण ही यहां पूजा करने आते हैं। विभीषण द्वारा पूजा-अर्चना करने की बात में कितनी सच्चाई है? यह तो कोई नहीं जानता, लेकिन ब्रह्म मुहूर्त में अदृश्य शक्ति द्वारा की जाने वाली पूजा के रहस्य से आज तक पर्दा नहीं उठ सका है।
21 मुखी बेल पत्र हैं यहांः ऐसा कहा जाता है कि भगवान शिव जी को बेल पत्र बहुत प्रिय है। यही वजह है कि उनकी पूजा-अर्चना में बेल पत्र रखा जाता है। अभिषेक करते समय भी उन पर बेल पत्र चढ़ाया जाता है। ईश्वरा महादेव शिवलिंग पर भी कई बार 21 मुखी बेल पत्र चढ़ा हुआ मिलता है। दरअसल मंदिर के आसपास जंगल में 21 मुखी, 11 मुखी, सात मुखी बेल पत्र मिल जाता है। यह भी अपने आप में अनोखा है। ऐसा बताया जाता है कि 21 मुखी बेल पत्र भारत में सिर्फ यहीं मिलता है।