– अरछा बरेठी-कमासिन मार्ग के निर्माण से 30 हजार की आबादी होगी लाभान्वित
– अपर सचिव डा0 आशीष कुमार गोयल भी निरीक्षण में रहे मौजूद
चित्रकूट,03 अप्रैल (हि.स.)। ग्रामीण विकास मंत्रालय, भारत सरकार के सचिव एन0एन0 सिन्हा व अपर सचिव डा0 आशीष कुमार गोयल, अपर मुख्य सचिव ग्राम्य विकास उत्तर प्रदेश शासन मनोज कुमार सिंह, मुख्य कार्यपालक अधिकारी यूपी एलटी के भानु चंद्र गोस्वामी द्वारा रविवार को जनपद चित्रकूट में प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के अन्तर्गत नई तकनीक एफडीआर के तहत यूपी के चित्रकूट जिले में निर्मित हो रही सड़क टी-06 अरछा बरेठी-कमासिन रोड का निरीक्षण किया गया।
इस मौके पर ग्रामीण मंत्रालय भारत सरकार के सचिव एन0एन0 सिन्हा ने बताया कि यह सड़क भारत सरकार द्वारा जनपद में पहली बार नई तकनीकी से बनाई जा रही है। उन्होंने कहा कि भारत सरकार द्वारा पी0एम0जी0एस0वाई0 के फेज-3 के अन्तर्गत उत्तर प्रदेश ग्रामीण सड़क विकास अभिकरण, ग्राम्य विकास विभाग, उत्तर प्रदेश को 19000.00 किमी0 का लक्ष्य दिया गया था, जिसे वर्ष 2024 तक पूर्ण किया जाना है। इस लक्ष्य के सापेक्ष उ0प्र0 ग्रामीण सड़क विकास अभिकरण, ग्राम्य विकास विभाग को वर्ष 2021-22 में ही लक्ष्य के सापेक्ष 18770.00 किमी0 की स्वीकृत ग्रामीण विकास मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा दे गयी है। स्वीकृति के उपरान्त 3000 किमी0 का कार्य पूर्ण किया जा चुका है तथा 3000 किमी0 कार्य प्रगति पर है जो अगले दो माह में पूर्ण हो जायेगा। उत्तर प्रदेश में नई तकनीक के माध्यम से रू0 6000 करोड़ की लागत से 697 मार्ग, 5500 किमी0 सड़क का निर्माण होना है।
प्रदेश सरकार द्वारा उत्तर प्रदेश के ग्रामीण क्षेत्रों में पहली बार नयी तकनीक (एफ0डी0आर0) पर आधारित 5600 किमी0 का निर्माण कराया जा रहा है। इस तकनीक से किफायती सड़कों का निर्माण होगा। ये सड़के मजबूत होने के साथ ही पर्यावरण के अनुकूल रहेंगी। इस तकनीक के निर्माण में नये पत्थर की गिट्टी का प्रयोग नहीं किया जाता है। सड़क पर मौजूद पुरानी गिट्टी को सीमेंट एवं एडिटिव तथा मिट्टी से बड़़ी मशीनों के द्वारा मिलाकर निर्माण किया जाता है। प्रदेश पी0एम0जी0एस0वाई0 में नयी तकनीक से सड़के बनाये जाने की स्थिति को देखते हुए अन्य प्रदेशों में भी इस तकनीक को लागू किया जा रहा है।
प्रदेश द्वारा नई तकनीक से मार्ग निर्माण की स्वीकृति के पूर्व इस तकनीक का अनुभव प्राप्त करने के लिए अभिकरण कार्यालय के साथ ही साथ लोक निर्माण विभाग तथा ग्रामीण अभियंत्रण विभाग के अधिकारियों के दल को विजयवाड़ा, आन्ध्र प्रदेश भेजकर इस तकनीक का अध्ययन कराया गया।साथ ही नई तकनीक से स्वीकृत मार्गों में से 09 मार्ग पायलेट प्रोजेक्ट के रूप में निर्माण कराये जाने का निर्णय लिया गया।
पायलट प्रोजेक्ट में जनपद प्रयागराज के दो मार्ग, चित्रकूट जनपद का एक मार्ग, हमीरपुर के दो मार्ग, झांसी का एक मार्ग, आगरा, हाथरस एवं मैनपुरी जनपदों के एक-एक मार्ग सम्मिलित हैं। इन मार्गाे पर निर्माण कार्य प्रारम्भ है। जिनकी गुणवत्ता एवं प्रगति अत्यधिक उत्साहजनक है। इस तकनीक से मार्गों के निर्माण में बहुत कम समय लगता है। यहां तक की व्यस्थानुसार दो दिन में एक किमी0 सड़क का निर्माण किया जा सकता है।
चित्रकूट में निर्माणाधीन मार्ग का पूर्व में पारम्परिक तकनीक से निर्माण किया जाना था। इस मार्ग की लम्बाई 17.9 किमी0 तथा चौड़ाई 3.00 मीटर थी जिसको बढ़ाकर 5.5 मीटर में चौड़ीकरण एवं उच्चीकरण किया जाना था, जिसमें लगभग 56000 घन मीटर पत्थर की गिट्टी का उपयोग होता। लेकिन इस एफ0डी0आर0 तकनीक से निर्माण कराने पर 50000 घन मीटर की गिट्टी की बचत होगी, जो स्वयं में एक उपलब्धि है।इसके अलावा पर्यावरण प्रदूषण एवं कार्बन फुड प्रिंट को कम करने में भी सहायक है।
प्रदेश में एफ0डी0आर0 तकनीक से पहली रोड जनपद चित्रकूट में 17 करोड़ की लागत से 17.900 किमी0 की सड़क का निर्माण हो रहा है। ये सड़क 02 मुख्य मार्गाें को जोड़ने के साथ ही 22 मजरों एवं 08 ग्राम पंचायतों को जोड़ रही है तथा इससे 30हजार की आबादी लाभान्वित होगी।
नयी तकनीक पर आधारित मार्गों के निर्माण की गुणवत्ता सुनिश्चित किये जाने के लिए एक पीएमयू का गठन किया गया है। जिसमें जापान का भी तकनीकी सहयोग लिया गया है। इस तकनीक से निर्मित सड़कों के लिए विशिष्ट मशीनों का उपयोग किया जा रहा है। जिसमें रिसाइकिलर, आटोमेटिक सीमेंट स्प्रेडर, 20 टन पैट फुट रोलर, टैण्डम रोलर, मोटर ग्रेडर एवं पीटीआर रोलर महत्वपूर्ण हैं। मार्गाे के निर्माण में गुणवत्ता की साइट पर ही जांच किये जाने हेतु सुसज्जित लैब स्थापित हैं।
इस अवसर पर मुख्य विकास अधिकारी अमित आसेरी, मुख्य अभियंता ग्रामीण अभियंत्रण सेवा वीरपाल राजपूत, अधीक्षण अभियंता हरेंद्र सिंह, उपजिलाधिकारी राजापुर प्रमोद कुमार झा, जिला विकास अधिकारी आर के त्रिपाठी, परियोजना निदेशक ऋषि मुनि उपाध्याय, डीसी मनरेगा धर्मवीर सिंह, अधिशासी अभियंता निर्माण विभाग अरविंद कुमार, सहित कई जनपदों के अधिशाषी अभियंता, सहायक अभियंता एवं अभियंता मौजूद रहे।