टीएमबीयू एमबीए पुस्तक खरीद घोटाला: 30 लाख की वित्तीय अनियमितता का मामला पहुंचा प्रथम अपील में

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भागलपुर, 02 नवंबर ।तिलकामांझी भागलपुर विश्वविद्यालय के एमबीए विभाग में करीब 30 लाख रुपये की पुस्तक खरीद का मामला अब विश्वविद्यालय प्रशासन के लिए एक बड़ी गले की फांस बनता जा रहा है। पुस्तक खरीद में कथित वित्तीय अनियमितता, टेंडर प्रक्रिया की अनदेखी और बाजार मूल्य से अत्यधिक दामों पर किताबों की खरीद का आरोप लगाते हुए यह मामला अब प्रथम अपील तक पहुंच गया है।

आरटीआइ एवं सामाजिक कार्यकर्ता डॉ. संतोष कुमार श्रीवास्तव ने बिहार लोक शिकायत निवारण व्यवस्था के तहत इस मामले में प्रथम अपील दायर की है। प्रमंडलीय आयुक्त कार्यालय में इस हाई-प्रोफाइल मामले की अगली सुनवाई 6 नवंबर को निर्धारित की गई है।

शिकायतकर्ता डॉ. संतोष श्रीवास्तव के अनुसार, इस पूरी खरीद प्रक्रिया में नियमों को ताक पर रखकर भारी गड़बड़ी की गई है। आरोप है कि बाजार में जिन पुस्तकों की वास्तविक कीमत करीब 600 से 700 रुपये थी, उन्हें विभाग द्वारा 4,000 से 5,000 रुपये प्रति पुस्तक की अत्यधिक दर पर खरीदा गया है।

शिकायतकर्ता का दावा है कि खरीद प्रक्रिया से संबंधित सरकारी फाइलों में निर्धारित टेंडर प्रक्रिया का पालन किए जाने का कोई उल्लेख नहीं है। प्रारंभिक तौर पर विश्वविद्यालय प्रशासन से केवल 279 पुस्तकों की खरीद की अनुमति (मंजूरी) ली गई थी। इसके विपरीत, नियमों की अनदेखी कर बाद में 800 से अधिक पुस्तकें खरीद ली गईं। विश्वविद्यालय स्तर पर पूर्व में इस मामले को लेकर आंतरिक जांच की सुगबुगाहट हुई थी, लेकिन जांच रिपोर्ट को सार्वजनिक नहीं किए जाने से विवाद और गहरा गया है।

इस संबंध में स्थानीय मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, विश्वविद्यालय प्रशासन पर शुरू से ही जांच रिपोर्ट को छिपाने और दोषियों को बचाने के आरोप लगते रहे हैं।

छात्रों और सामाजिक संगठनों का कहना है कि उच्च शिक्षा के इस प्रतिष्ठित केंद्र में इस तरह की वित्तीय हेराफेरी गंभीर चिंता का विषय है। अब सबकी नजरें 6 नवंबर को प्रमंडलीय आयुक्त कार्यालय में होने वाली सुनवाई पर टिकी हैं, जहां विश्वविद्यालय प्रशासन को इन वित्तीय अनियमितताओं और टेंडर प्रक्रिया से जुड़े तीखे सवालों के जवाब देने होंगे।