संघ के विजयदशमी उत्सव में सामाजिक समरसता और राष्ट्र निर्माण का आह्वान

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हाथरस, 20 अक्टूबर । उत्तर प्रदेश के हाथरस जिले में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) राष्ट्र, धर्म और समाज की सेवा के संकल्प के साथ अपने 101वें वर्ष में प्रवेश कर रहा है। हिंदू समाज को एकजुट कर भारत को विश्व में सर्वोच्च स्थान पर पहुंचाने के लिए सभी को मिलकर कार्य करना होगा।

यह विचार संघ के जिला प्रचारक जितेंद्र ने सूर्यनगर बस्ती एवं मितई बस्ती की ओर से डीआरबी इंटर कॉलेज में आयोजित विजयदशमी उत्सव में मुख्य वक्ता के रूप में व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि संघ के स्वयंसेवकों ने हर परिस्थिति में चुनौतियों का मजबूती से सामना किया है। हिंदू समाज को विभाजित करने के प्रयास देश और विदेशों से किए गए, लेकिन वे सफल नहीं हुए। उन्होंने समाज में एकता, सद्भाव और समरसता को मजबूत करने का आह्वान किया।

कार्यक्रम का शुभारंभ जिला प्रचारक जितेंद्र, नगर संघचालक डॉ. पीपी सिंह और कार्यक्रम अध्यक्ष एवं युवा समाजसेवी सोनू ठाकुर ने संघ के संस्थापक एवं आद्य सरसंघचालक डॉ. केशवराव बलिराम हेडगेवार, पूज्य गुरुजी और भारत माता के चित्रों पर पुष्प अर्पित कर किया। इसके बाद अतिथियों ने शस्त्र पूजन किया। कार्यक्रम में स्वयंसेवक ने एकल गीत प्रस्तुत किया।

जिला प्रचारक जितेंद्र ने भगवान श्रीराम के आदर्शों का उल्लेख करते हुए कहा कि शबरी के बेर स्वीकार करने तथा निषादराज और जटायु को सम्मान देने के प्रसंग समाज में समानता, समरसता और भेदभाव मिटाने का संदेश देते हैं। उन्होंने कहा कि मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीराम के आदर्शों को अपनाकर ही देश में रामराज्य की परिकल्पना को साकार किया जा सकता है। समाज में आपसी सद्भाव, एकता और समरसता को मजबूत करना प्रत्येक नागरिक का दायित्व है।

शस्त्र पूजन की परंपरा पर प्रकाश डालते हुए उन्होंने कहा कि देवी-देवताओं ने धर्म और समाज की रक्षा के लिए शस्त्र धारण किए। इसी प्रकार राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ने समाज की रक्षा और अनुशासन के प्रतीक के रूप में दंड को अपनाया है। उन्होंने कहा कि व्यक्ति और समाज को संघर्षशील, शक्तिशाली और साहसी बने रहना चाहिए, क्योंकि शक्ति और साहस से ही चुनौतियों का सामना किया जा सकता है। विजयदशमी का पर्व अन्याय और अधर्म के विरुद्ध खड़े होने की प्रेरणा देता है।