छिंदवाड़ा, 17 अक्टूबर । मध्य प्रदेश के छिंदवाड़ा जिले के शिक्षा विभाग में माध्यमिक शिक्षा मंडल की बोर्ड परीक्षाओं के संचालन के लिए जिला नोडल अधिकारी की नियुक्ति चर्चा का विषय बन गई है। जिला शिक्षा अधिकारी द्वारा एक महिला शिक्षक को यह जिम्मेदारी सौंपे जाने के बाद नियुक्ति के औचित्य, नियमों और चयन प्रक्रिया को लेकर सवाल उठ रहे हैं। आपत्तियों के केंद्र में यह मुद्दा है कि जब बोर्ड परीक्षाओं के संचालन के लिए विभागीय व्यवस्था पहले से मौजूद है, तो अतिरिक्त नोडल अधिकारी नियुक्त करने की आवश्यकता क्यों पड़ी और इसके लिए किस स्तर से अनुमति ली गई।
इस मामले में नियुक्ति आदेश का आधार, पद की आवश्यकता और चयन के लिए अपनाए गए मानदंड स्पष्ट किए जाने की मांग उठ रही है। हालांकि, नियुक्ति में अनियमितता के आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। ऐसे में संबंधित दस्तावेजों और विभागीय प्रक्रिया की जांच के बाद ही स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, नियुक्ति आदेश में महिलाओं की संख्या और उनसे जुड़ी समस्याओं को ध्यान में रखते हुए बोर्ड परीक्षा संचालन के लिए जिला नोडल अधिकारी नियुक्त करने का उल्लेख किया गया है। महिलाओं की समस्याओं का समाधान और प्रशासन में उनकी भागीदारी सुनिश्चित करना महत्वपूर्ण उद्देश्य हैं, लेकिन इस मामले में सवाल उठाया जा रहा है कि क्या इसके लिए नया पद सृजित करना आवश्यक था।
नियुक्ति को लेकर एक प्रमुख सवाल यह भी है कि क्या मध्य प्रदेश के अन्य जिलों में बोर्ड परीक्षा संचालन के लिए इसी तरह के नोडल अधिकारी नियुक्त किए गए हैं। यदि यह व्यवस्था केवल छिंदवाड़ा में लागू की गई है, तो इसके पीछे की विशेष परिस्थितियों और प्रशासनिक जरूरतों का विवरण सामने आना चाहिए। इस संबंध में माध्यमिक शिक्षा मंडल, लोक शिक्षण संचालनालय, संभागीय संयुक्त संचालक अथवा शासन स्तर से लिखित मार्गदर्शन या अनुमति प्राप्त किए जाने की जानकारी भी महत्वपूर्ण है। यदि ऐसा कोई अनुमोदन उपलब्ध है, तो उसे सार्वजनिक करने से उठ रहे सवालों का समाधान हो सकता है।
कार्यभार अधिक होने पर अन्य पदों के लिए भी बनेगी ऐसी व्यवस्था?
इस नियुक्ति पर उठ रहे सवालों के बीच अतिरिक्त कार्यभार के आधार पर नए पद की आवश्यकता तय करने के तर्क पर भी चर्चा हो रही है। सवाल उठाया जा रहा है कि यदि कार्यभार और महिलाओं से जुड़ी समस्याओं के आधार पर अतिरिक्त नोडल अधिकारी की नियुक्ति उचित मानी जाती है, तो क्या अन्य प्रशासनिक पदों पर भी इसी तरह की व्यवस्था लागू की जाएगी?
क्या एसडीएम, पुलिस अधीक्षक, कलेक्टर और दूसरे विभागीय अधिकारियों के लिए भी अलग-अलग नोडल अधिकारी नियुक्त किए जाएंगे? यदि कार्यभार अतिरिक्त पद का आधार है, तो अनेक प्रशासनिक जिम्मेदारियां निभाने वाले जिला शिक्षा अधिकारी के लिए ऐसी व्यवस्था की आवश्यकता पर भी विचार होना चाहिए।
शिक्षा विभाग में उपलब्ध अनुभवी शिक्षकों की तुलना में नियुक्ति के लिए अपनाए गए मानदंडों को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। मनीषा मिश्रा, अंजली गुप्ता सहित अन्य अनुभवी शिक्षकों की उपलब्धता के संदर्भ में यह स्पष्ट किया जाना चाहिए कि संबंधित जिम्मेदारी सौंपने के लिए किन योग्यताओं और प्रशासनिक अनुभव को आधार बनाया गया।
क्या इस जिम्मेदारी के लिए कोई निर्धारित योग्यता तय थी? क्या वरिष्ठता को महत्व दिया गया? क्या अन्य पात्र शिक्षकों से विकल्प मांगे गए या सीधे नियुक्ति आदेश जारी कर दिया गया?
यदि नियुक्ति योग्यता और प्रशासनिक आवश्यकता के आधार पर की गई है, तो उसके समर्थन में संबंधित दस्तावेज सामने रखे जाने चाहिए। वहीं, यदि प्रक्रिया में किसी प्रकार की अनियमितता हुई है, तो उसकी निष्पक्ष जांच की जानी चाहिए।
व्यक्तिगत निकटता और आर्थिक लेन-देन से जुड़े आरोपों की निष्पक्ष जांच जरूरी
नियुक्ति को लेकर कुछ लोगों के बीच कथित व्यक्तिगत निकटता और आर्थिक लेन-देन से संबंधित सवाल भी चर्चा में बताए जा रहे हैं। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि के लिए कोई दस्तावेज या ठोस प्रमाण उपलब्ध नहीं हैं। इसलिए इन दावों को प्रमाणित तथ्य मानने के बजाय संबंधित आदेश, फाइल नोटिंग, अनुमोदन और नियुक्ति प्रक्रिया की जांच के आधार पर ही निष्कर्ष निकाला जाना चाहिए।
यदि जांच में अनुचित प्रभाव या आर्थिक लेन-देन से जुड़े प्रमाण मिलते हैं, तो संबंधित व्यक्तियों के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई की जानी चाहिए। इसके विपरीत, यदि नियुक्ति निर्धारित नियमों के अनुरूप हुई है, तो विभाग को उसका स्पष्ट आधार सामने रखकर उठ रहे सवालों का जवाब देना चाहिए।
अब इस मामले में जिला प्रशासन और शिक्षा विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों की भूमिका महत्वपूर्ण मानी जा रही है। सवाल है कि क्या जिला कलेक्टर नियुक्ति आदेश के आधार और उसकी नियमसम्मतता की समीक्षा कराएंगे? क्या संबंधित अधिकारी नियुक्ति प्रक्रिया और पद की आवश्यकता को लेकर स्थिति स्पष्ट करेंगे? साथ ही, यह भी बताया जाएगा या नहीं कि अतिरिक्त नोडल अधिकारी की नियुक्ति से बोर्ड परीक्षा संचालन में किस तरह का ठोस सुधार अपेक्षित है।
