रांची, 14 अक्टूबर । झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (जेएसएससी) की ओर से आयोजित इंटरमीडिएट प्रशिक्षित शिक्षक संयुक्त प्रतियोगिता परीक्षा (पारा कोटि) 2026 में शामिल होने की अनुमति मांगने वाले पारा शिक्षकों को झारखंड उच्च न्यायालय से अंतरिम राहत नहीं मिली है। न्यायमूर्ति दीपक रोशन की अदालत ने ऋषिकांत तिवारी एवं अन्य की याचिका पर सुनवाई करते हुए राहत देने से इनकार किया। हालांकि, अदालत ने प्रार्थियों को शिक्षा विभाग के समक्ष अभ्यावेदन देकर अपना पक्ष रखने की छूट दी है।
सुनवाई के दौरान प्रार्थियों ने अदालत को बताया कि वे इंटरमीडिएट प्रशिक्षित शिक्षक (कक्षा 1 से 5) की परीक्षा में शामिल होना चाहते हैं। लेकिन जेएसएससी के विज्ञापन में पात्रता की शर्त के अनुसार, अभ्यर्थियों के लिए झारखंड शिक्षक पात्रता परीक्षा (जेटेट) या निकटवर्ती राज्यों की केंद्रीय शिक्षक पात्रता परीक्षा (सीटेट) अथवा शिक्षक पात्रता परीक्षा (टेट) उत्तीर्ण होना जरूरी है। साथ ही, निर्धारित शर्तों के तहत तीन साल के भीतर जेटेट उत्तीर्ण करना अनिवार्य बताया गया है।
प्रार्थियों की ओर से अदालत में दलील दी गई कि उन्होंने न तो जेटेट उत्तीर्ण किया है और न ही निकटवर्ती राज्यों से सीटेट या टेट पास किया है। उन्होंने आग्रह किया कि उन्हें परीक्षा में शामिल होने की अनुमति दी जाए। इसके लिए उन्होंने तीन साल के भीतर जेटेट उत्तीर्ण करने का भरोसा दिया।
वहीं, जेएसएससी की ओर से अधिवक्ता संजय पिपरावाल ने इसका विरोध किया। उन्होंने कहा कि प्रार्थी विज्ञापन में निर्धारित पात्रता शर्तों को पूरा नहीं करते हैं। ऐसे में उन्हें परीक्षा में शामिल होने की अनुमति नहीं दी जा सकती। उन्होंने यह भी बताया कि उच्चतम न्यायालय के सुनील यादव मामले में पारित आदेश के आधार पर पारा शिक्षक कोटि के लिए विज्ञापन जारी किया गया है।
उल्लेखनीय है कि जेएसएससी ने विज्ञापन संख्या 4/26 के तहत इंटरमीडिएट प्रशिक्षित शिक्षक (कक्षा 1 से 5) और इंटरमीडिएट प्रशिक्षित शिक्षक (कक्षा 6 से 8) के 5,000 से अधिक पदों पर भर्ती के लिए आवेदन आमंत्रित किए हैं। परीक्षा के लिए आवेदन करने की अंतिम तिथि 18 अक्टूबर 2026 निर्धारित है।
