हांसी जिले और पूरे हरियाणा का गौरव बढ़ाया है।
लगातार मेहनत और खेल के प्रति समर्पण
के दम पर तनु ने यह साबित कर दिया कि छोटे गांवों की बेटियां भी अंतरराष्ट्रीय मंच
पर देश का परचम लहरा सकती हैं। तनु के मामा योगेश शर्मा ने बताया कि तनु को बचपन से
ही खेलों में खास रुचि थी। उसकी प्रतिभा और कुश्ती के प्रति लगाव को देखते हुए उसके
चाचा एवं भारतीय सेना से सेवानिवृत्त नरेंद्र शर्मा ने उसे कुश्ती के लिए प्रोत्साहित
किया। इसके बाद तनु ने सातवीं कक्षा से कोच संजय सिहाग के मार्गदर्शन में कुश्ती का
प्रशिक्षण शुरू किया।
हिसार में निखरी प्रतिभा, अंतरराष्ट्रीय स्तर
पर बनाई पहचान
कुश्ती के शुरुआती प्रशिक्षण के बाद स्पोर्ट्स
सेंटर के कोच सुनील ढुल और राजेश नांदल ने तनु की प्रतिभा को तराशने में महत्वपूर्ण
भूमिका निभाई। नियमित अभ्यास, कड़ी मेहनत और अनुशासन के दम पर तनु ने धीरे-धीरे अपनी
पहचान बनाई और अंतरराष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिताओं के लिए खुद को तैयार किया।
तनु के पिता वीरेंद्र शास्त्री सरकारी विद्यालय
में संस्कृत अध्यापक हैं, जबकि उनकी माता सुमन लता गृहिणी हैं। परिवार ने तनु के खेल
सफर में लगातार उसका हौसला बढ़ाया। अब विश्व चैंपियनशिप में रजत पदक जीतने के बाद परिवार
के साथ-साथ गांव के लोग भी उसकी उपलब्धि पर गर्व महसूस कर रहे हैं। तनु के दादा मंगत राम शर्मा ने खुशी जताते हुए
कहा कि तनु ने कम उम्र में ही बड़ी उपलब्धि हासिल की है। उन्हें पूरा विश्वास है कि
वह आने वाले समय में और बेहतर प्रदर्शन करेगी और ओलंपिक में पदक जीतकर देश का नाम रोशन
करेगी।