चित्तौड़गढ़, 25 जुलाई । जिला कारागृृह में मौजूद विचाराधीन और सजायाप्ता बंदियाें को सुविधाएं मिलने और निषेध सामग्री अंदर पहुंचाने के मामले कई बार सामने आए है। लेकिन गुरुवार को वीडियो वायरल होने के बाद जेल की व्यवस्थाओं और सुरक्षा पर बड़े सवाल खड़े हो गए है। वायरल वीडियो में हत्या के आरोपित अन्य बंदी नृत्य करते, नशा करते और दाल-बाटी खाते नजर आ रहे है। अब सवाल यह है कि आखिर जेल प्रबन्धन इस दाैरान क्या कर रहा था जबकि दाल-बाटी जेल मेन्यू में शामिल नहीं। बताया जाता है कि दाल-बाटी का कोई मेन्यू नहीं है, लेकिन बंदियों को जेल प्रशासन ने मनचाहे तरीके से खाना परोस रहा है। जेल में होने के बावजूद उनकी सुविधाओं और रंगरेलियों में कोई प्रभाव नहीं पड़ रहा था। ऐसे में जेल प्रबन्धन की कार्य प्रणाली पर सवाल खड़े हो रहे है।
जानकारी के अनुसार गत गुरुवार शाम को जिला जेल चित्तौड़गढ़ के तीन वीडियो सामने आए थे। इसमें हिस्ट्रीशीटर एवं हत्या के मामले में जेल में बंद बंदी नशा कर रहे थे। एक वीडियो में दाल – बाटी खा रहे थे और एक में बंदी गानों पर नाच रहे थे। ऐसे में बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि जेल में नाचने-गाने की व्यवस्था और नशे की सामग्री अंदर कैसे पहुंच पा रही थी। वहीं इस संबंध में जेल प्रशासन से जानकारी जुटाई गई है। इसमें जेल के मेन्यू में दाल बाटी नहीं है। इसके विपरीत वायरल वीडियो में बंदी दाल बाटी का सेवन करते दिख रहे हैं। अब यह कुछ बंदियों के दबाव में दाल बाटी बनी या सभी को उस दिन भोजन में यही भोजन दिया, जो भी जांच का विषय हैं। इस मामले में जेल अधीक्षक सीधे दोषी है।
गौरतलब है कि कुछ माह पूर्व तत्कालीन जिला कलक्टर आलोक रंजन ने जेल में जांच के दौरान एक मोबाइल अजयराज सिंह हत्याकांड के आरोपित ईश्वर सिंह डेट से पकड़ा था। इसे लेकर कोतवाली थाने में एफआईआर दर्ज की गई थी। लेकिन उस मामले की जांच भी आज तक लम्बित है। सूत्र बताते है कि उस मामले में कथित रूप से उच्चाधिकारियों ने जांच में कार्यवाही नहीं करने के निर्देश दिए थे और इसी का परिणाम रहा कि जेल में लगातार निषेध सामग्री की पहुंच और बंदियों को लगातार सुविधाएं मिल पा रही थी।
सूत्र बताते है कि जिला कारागृह में पिछले कुछ समय से पोपाबाई का राज कायम हो गया है। जेल में रहने वाले बंदियों को आसानी से रूपया देने पर सब चीज उपलब्ध हो रही है। जानकारों का कहना है कि जेल के लिए हर चीज के दाम फिक्स किये जाते है और बंदियों को निषेध सामग्री उपलब्ध हो जाती है। यह भी जानकारी है कि कुछ बंदियों द्वारा ही जेल में गिरोह बना दिया गया है जो दूसरे बंदियों को नशे की सामग्री तक उपलब्ध करा देते है। कुछ लोग बताते है कि तम्बाकू की पुड़िया के दाम एक हजार रुपये तय किये है और उसमें से एक हिस्सा जेल प्रबन्धन को मिल जाता है।
इस संबंध में डीआईजी जेल उदयपुर राकेश मोहन शर्मा का कहना है कि जेल के मेन्यू में दाल बाटी शामिल नहीं है। चित्तौड़गढ़ जेल में मिले मोबाइल और वायरल वीडियो को लेकर जेल प्रशासन ने पुलिस थाने में रिपोर्ट दी है। आपराधिक प्रकरण की जांच पुलिस की और से की जाएगी। इसके अलावा मोबाइल और अन्य सामग्री जेल में कैसे पहुंची इसकी विभागीय जांच की जा रही है। जेल अधीक्षक की और से इसकी रिपोर्ट बना कर मुख्यालय भेजी जाएगी।