दमोह, 24 जून । मध्य प्रदेश के दमोह जिले के ऐतिहासिक सिंग्रामपुर में बुधवार को वीरांगना रानी दुर्गावती के बलिदान दिवस पर आयोजित गरिमामय कार्यक्रम में उनके अद्वितीय शौर्य, त्याग, राष्ट्रभक्ति और जनजातीय गौरव को स्मरण करते हुए श्रद्धांजलि अर्पित की गई। कार्यक्रम में केंद्रीय एवं प्रदेश सरकार के वरिष्ठ जनप्रतिनिधियों ने भाग लेकर रानी दुर्गावती के जीवन चरित्र को नई पीढ़ी के लिए प्रेरणास्रोत बताया।
केंद्रीय जनजातीय कार्य राज्यमंत्री दुर्गादास उइके ने अपने संबोधन में कहा कि वीरांगना रानी दुर्गावती भारतीय इतिहास की ऐसी महान शासक थीं जिन्होंने महिलाओं को संगठित कर उन्हें सैन्य प्रशिक्षण प्रदान किया तथा आत्मरक्षा एवं राष्ट्ररक्षा में उनकी सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित की। उन्होंने कहा कि उस दौर में महिलाओं को सशक्त बनाने का जो कार्य रानी दुर्गावती ने किया, वही भावना आज प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में संचालित विभिन्न महिला कल्याणकारी योजनाओं में दिखाई देती है।
उन्होंने कहा कि ‘बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ’, ‘उज्ज्वला योजना’, ‘लाड़ली बहना’, ‘लाड़ली लक्ष्मी’ और ‘लखपति दीदी’ जैसी योजनाएं महिलाओं को आत्मनिर्भर और सशक्त बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं। श्री उइके ने कहा कि आदिवासी समाज की बेटी द्रौपदी मुर्मू का देश के सर्वोच्च संवैधानिक पद राष्ट्रपति तक पहुंचना पूरे जनजातीय समाज के सम्मान और गौरव का प्रतीक है।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए प्रदेश के आदिम जाति कल्याण एवं भोपाल गैस त्रासदी राहत मंत्री कुँवर विजय शाह ने कहा कि प्रदेश सरकार आदिवासी युवाओं को प्रशासनिक एवं न्यायिक सेवाओं में अवसर दिलाने के लिए बड़े स्तर पर कार्य कर रही है। उन्होंने घोषणा की कि आगामी 15 अगस्त से जबलपुर में आईएएस एवं अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए विशेष आवासीय कोचिंग केंद्र प्रारंभ किए जाएंगे, जहां विद्यार्थियों को निःशुल्क आवास, भोजन और गुणवत्तापूर्ण मार्गदर्शन उपलब्ध कराया जाएगा।
उन्होंने बताया कि क्लैट परीक्षा की तैयारी के लिए भी विशेष प्रशिक्षण व्यवस्था शुरू की जाएगी। इसके तहत 50 छात्राओं एवं 50 छात्रों का चयन कर उन्हें दो वर्षों तक आवासीय सुविधा सहित प्रशिक्षण दिया जाएगा, ताकि वे न्यायिक एवं विधि क्षेत्र में अपना भविष्य बना सकें।
मंत्री शाह ने कहा कि प्रदेश सरकार आदिवासी संस्कृति और गौरव के संरक्षण के लिए ‘रानी दुर्गावती लोक’ की स्थापना की दिशा में कार्य कर रही है। यह परियोजना वीरांगना रानी दुर्गावती की वीरता, त्याग और जनजातीय विरासत को नई पीढ़ी तक पहुंचाने का महत्वपूर्ण माध्यम बनेगी।
उन्होंने ग्राम चौरई स्थित बड़ा देव मंदिर परिसर में प्रतिवर्ष पांच दिवसीय मेले के आयोजन हेतु 30 लाख रुपये की स्वीकृति की घोषणा की। साथ ही प्रियांशी भलावी की कलामंडली के सदस्यों को पांच-पांच हजार रुपये तथा प्रियांशी भलावी को 21 हजार रुपये की प्रोत्साहन राशि देने की घोषणा की। कार्यक्रम में आदिवासी संग्रहालय स्थापित करने की भी घोषणा की गई।
प्रदेश के संस्कृति, पर्यटन, धार्मिक न्यास एवं धर्मस्व राज्य मंत्री धर्मेन्द्र सिंह लोधी ने कहा कि रानी दुर्गावती ने मुगल आक्रांताओं के विरुद्ध संघर्ष कर भारतीय इतिहास में अद्वितीय साहस और पराक्रम का परिचय दिया। उन्होंने कहा कि रानी दुर्गावती का जीवन त्याग, स्वाभिमान और राष्ट्रभक्ति की ऐसी प्रेरणादायी मिसाल है जो सदैव समाज और युवाओं का मार्गदर्शन करती रहेगी।
राज्यमंत्री लोधी ने कहा कि सिंगौरगढ़ क्षेत्र, जो कभी रानी दुर्गावती की राजधानी रहा है, उससे जुड़े होने का गौरव पूरे क्षेत्र को प्राप्त है। उन्होंने कहा कि शहीदों और वीरांगनाओं का बलिदान कभी भुलाया नहीं जा सकता और उनके आदर्शों को नई पीढ़ी तक पहुंचाना हम सभी का कर्तव्य है।
कार्यक्रम में वक्ताओं ने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव द्वारा सिंगौरगढ़ क्षेत्र के विकास के लिए किए जा रहे प्रयासों का उल्लेख करते हुए कहा कि इस ऐतिहासिक धरोहर को राष्ट्रीय पहचान दिलाने की दिशा में निरंतर कार्य किया जा रहा है। साथ ही युवाओं से शिक्षा, सामाजिक जागरूकता और नशामुक्त समाज के निर्माण में सक्रिय भूमिका निभाने का आह्वान किया गया।
मध्य प्रदेश राज्य पिछड़ा वर्ग कल्याण आयोग के अध्यक्ष डॉ. रामकृष्ण कुसमरिया ने कहा कि रानी दुर्गावती केवल एक वीरांगना नहीं बल्कि साहस, कर्तव्यनिष्ठा और राष्ट्रप्रेम की अमर प्रतीक हैं। उनके आदर्शों को अपनाकर समाज और राष्ट्र के विकास में महत्वपूर्ण योगदान दिया जा सकता है।
कार्यक्रम के अंत में उपस्थित जनसमुदाय ने वीरांगना रानी दुर्गावती के आदर्शों को आत्मसात करने तथा समाज, संस्कृति और राष्ट्र निर्माण में सक्रिय योगदान देने का संकल्प लिया।