नई दिल्ली, 19 जून । नीट की 21 जून को होने वाली दोबारा परीक्षा के खिलाफ करीब 1600 से ज्यादा छात्रों ने उच्चतम न्यायालय का दरवाजा खटखटाया है। इन छात्रों ने दोबारा हो रही परीक्षा को कुछ समय के लिए स्थगित करने की मांग की है। हालांकि, चीफ जस्टिस सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली वेकेशन पीठ ने कहा कि इस मसले पर जस्टिस पीएस नरसिम्हा की पीठ पहले से सुनवाई कर रही है इसलिए वही पीठ जुलाई में सुनवाई करेगी।
सुनवाई के दौरान छात्रों की ओर से वकील अदील अहमद ने कहा कि पेपर लीक की खबरों और सोशल मीडिया पर फैली अफवाहों के कारण अभ्यर्थी भारी मानसिक दबाव में हैं। परीक्षा के ठीक पहले अभ्यर्थी वेबसाइट क्रैश होने की वजह से नीट का एडमिट कार्ड भी डाउनलोड नहीं कर पा रहे हैं। तब चीफ जस्टिस ने कहा कि इस मामले से जुड़ी सभी दलीलें जस्टिस पीएस नरसिम्हा की अध्यक्षता वाली पीठ के समक्ष रखी जाएं क्योंकि इस मसले से जुड़ी दूसरी याचिकाएं वहीं लंबित हैं।
इसके पहले 17 जून को उच्चतम न्यायालय ने नीट परीक्षा रद्द करने और 21 जून को दोबारा परीक्षा पर रोक की मांग पर जुलाई में सुनवाई करने का आदेश दिया था। चीफ जस्टिस सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा था कि इस याचिका को जस्टिस पीएस नरसिम्हा की अध्यक्षता वाली पीठ के समक्ष लिस्ट किया जाए जो पहले से ही नीट मामलों की सुनवाई कर रहे हैं।
याचिका स्वास्थ्य सेवाओं की पूर्व सहायक डॉ मंगला कोहली ने दायर किया है। याचिका में नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (एनटीए) के उस फैसले को चुनौती दी गई है जिसमें 3 मई को हुई परीक्षा को पूरी तरह रद्द कर दिया गया था। ये परीक्षा पेपर लीक के आरोपों के बाद रद्द कर दिया गया था। इन आरोपों के बाद नीट की 21 जून को दोबारा परीक्षा आयोजित कराने का फैसला किया गया।
याचिका में नीट की दोबारा परीक्षा की प्रक्रिया पर रोक लगाने की मांग की गई है। याचिका में कहा गया है कि परीक्षा को पूरी तरह रद्द करना और पूरे देश में दोबारा परीक्षा कराना उन लाखों उम्मीदवारों के साथ नाइंसाफी होगी जिनका पेपर लीक और गड़बड़ियों से कोई संबंध नहीं था। परीक्षा में कदाचार का इस्तेमाल करने के गंभीर आरोप हैं और इनमें शामिल हर व्यक्ति की जांच और कार्रवाई होनी चाहिए। लेकिन परीक्षा कराने वाले प्राधिकार की विफलताओं का खामियाजा अभ्यर्थियों को नहीं भुगतना चाहिए। दोबारा परीक्षा कारने का फैसला मनमाना और असंगत है। ये फैसला संविधान के अनुच्छेद 14, 19(1)(जी) और 21 का उल्लंघन है।