बलरामपुर, 16 जून । आज मंगलवार को कृषि विज्ञान केंद्र जाबर में आयोजित कार्यशाला के दौरान किसानों को प्राकृतिक एवं जैविक खेती, जल संरक्षण तथा सतत कृषि पद्धतियों की विस्तृत जानकारी दी गई। कार्यशाला में विभिन्न विभागों द्वारा लगाए गए स्टॉलों ने किसानों को आधुनिक कृषि तकनीकों से परिचित कराया।
कार्यक्रम में किसानों को जैविक खेती के तहत जैविक खाद, जीवामृत, बीजामृत, प्राकृतिक कीट प्रबंधन, एकीकृत कृषि प्रणाली, पशुपालन एवं मत्स्य पालन से जुड़ी नवीन तकनीकों की जानकारी दी गई। किसानों ने स्टॉलों का अवलोकन कर विशेषज्ञों से सीधा संवाद किया और खेती से जुड़ी अपनी जिज्ञासाओं का समाधान प्राप्त किया।
कार्यक्रम स्थल पर जल संरक्षण, ठोस अपशिष्ट प्रबंधन एवं नील-हरित शैवाल पर आधारित जीवंत प्रदर्शनी भी लगाई गई। इस प्रदर्शनी के माध्यम से किसानों एवं आम नागरिकों को प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण, पर्यावरण संतुलन एवं सतत विकास के महत्व की जानकारी दी गई।
विशेष रूप से 5 प्रतिशत संरचना मॉडल के माध्यम से खेतों में वर्षा जल संचयन की तकनीकों का प्रदर्शन किया गया, जिससे किसानों को सीमित संसाधनों में जल संरक्षण के प्रभावी उपाय समझाए गए। साथ ही नील-हरित शैवाल के उपयोग से भूमि की उर्वरता बढ़ाने की जानकारी भी दी गई। ठोस अपशिष्ट प्रबंधन मॉडल के माध्यम से कचरे के वैज्ञानिक निपटान और पुनर्चक्रण की प्रक्रिया को समझाया गया।कार्यक्रम में किसानों, जनप्रतिनिधियों एवं नागरिकों ने प्रदर्शनी में गहरी रुचि दिखाई और विभिन्न मॉडलों की सराहना की।
इसी दौरान हितग्राहीमूलक योजनाओं के तहत विभिन्न विभागों द्वारा सामग्रियों एवं सहायता राशि का वितरण भी किया गया। एनआरएलएम के अंतर्गत महिला समूहों को बैंक लिंकेज चेक, स्वच्छ भारत मिशन के तहत स्वच्छाग्रही ड्रेस, पीएम स्वनिधि योजना के अंतर्गत हितग्राहियों को चेक, मत्स्य पालन विभाग द्वारा जाल एवं आइस बॉक्स, कृषि विज्ञान केंद्र द्वारा जैविक खाद पैकेट, उद्यानिकी विभाग द्वारा ड्रिप सिंचाई किट, कृषि विभाग द्वारा मूंग बीज मिनीकिट तथा स्वास्थ्य विभाग द्वारा आयुष्मान कार्ड वितरित किए गए।
कार्यक्रम का उद्देश्य किसानों को आधुनिक तकनीक, नवाचार एवं सरकारी योजनाओं से जोड़कर उनकी आय बढ़ाना तथा टिकाऊ कृषि प्रणाली को बढ़ावा देना रहा।